उत्तर प्रदेशकानपुर

अभियंताओं की ठेकेदारों से यारी, नगर निगम के खजाने पर पड़ी भारी  

कानपुर। नगर निगम में इंजीनियर और ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम खजाने पर पड़ रहा है नियमों को दरकिनार करते हुए नगर निगम के अभियंता ठेकेदारों पर कृपा लुटा रहे हैं। एक नहीं कई मामले जब ऐसे हुए तो ऑडिट ने आपत्ति जताते हुए नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता को इस बात की जानकारी दी, इसके बाद मुख्य अभियंता को जोनल अभियंताओं के पेंच कसने पड़े हैं।
नगर निगम की तरफ से जो विकास कार्य कराए जाते हैं,तो उनके टेंडर की शर्तों में यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि अगर संबंधित कार्य तय समय पर नहीं पूरा हुआ तो ठेकेदार से जुर्माना वसूला जाएगा। हालांकि, इस नियम का नगर निगम के अभियंता शायद ही पालन करते हों। अभियंताओं की ठेकेदारों से ऐसे यारी है कि उसका असर नगर निगम के खजाने पर भी पड़ता है। लगातार इसी तरह की फाइलें आने के बाद मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने नगर आयुक्त के पास अपनी विशेष आपत्ति भेजी है। इस आपत्ति में इस बात का जिक्र किया गया है कि, ठेकेदारों की तरफ से कार्य तय समय से न पूरा करने के बावजूद अनुबंध की शर्तों के मुताबिक उन पर जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। इसमें खासतौर पर जोन तीन के कुछ कामों का उल्लेख भी किया गया है।
ठेकेदारों से यारी ऐसी निभाई जा रही है कि रॉयल्टी में भी यही खेल किया जा रहा हैण् इसके बाद मुख्य अभियंता सिविल कैलाश सिंह को जोनल अभियंताओं से यह कहना पड़ा कि जानबूझकर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्य अभियंता ने सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देश दिए हैं कि अगर कोई ठेकेदार रॉयल्टी से संबंधित निर्धारित प्रपत्र नहीं देता है तो नियमानुसार रॉयल्टी मद में कटौती की जाए पूर्व में जो काम कराए गए हैं, उसकी समीक्षा भी करने को कहा गया है।
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