उत्तर प्रदेश

योगी सरकार की ओर से मीडिया को लिखित में दिया ब्लैकमेलर का तमगा

राजेन्द्र के. गौतम
लखनऊ। इसे अपर मुख्य सचिव सूचना की कार्यप्रणाली पर सवाल कहें या फिर आला अफसरों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजरों में मीडिया को ब्लैकमेलर साबित करने की चाहत। 2 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुर्ई अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों की बैठक के बाद नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग द्वारा 15 जनवरी को जारी किए गए कार्यवृत्त के 21 नम्बर के बिन्दुओं में कहा गया है कि मीडिया में सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों और उपलब्धियों का विवरण नहीं दिया जा रहा है। मीडिया में सरकार के खिलाफ निगेटिविटी बहुत है। व्यवस्था का एक निगेटिव पहलू यह भी है कि मीडिया के लोगों ने ब्लैकमेलिंग करने की परिपाटी बना रखी है। यह कार्यवृत्त नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग द्वारा सभी अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों को भेजा जा रहा है। इस रवैये को लेकर जहां पंचमतल से लेकर कार्मिक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं कुछ मीडिया संगठनों ने नाराजगी जताई तो कुछ ने चुप्पी साध ली है।

उल्लेखनीय है कि 2 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों के साथ विभागीय बजट की निर्गत वित्तीय स्वीकृतियां एवं व्यय की प्रगति की समीक्षा बैठक हुई थी। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघल के निर्देश पर नियुक्ति अनुभाग-9 के पत्रांक संख्या 69/दो-9-2020 से जारी कार्यवृत्त नौकरशाही में चल रही रस्साकशी की पोल खोल कर रख दी है। यूपी के इतिहास में पहली बार है कि मीडिया पर सीधा निशाना साधते हुए कार्यवृत्त के जरिए सभी अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों को लिखित तौर पर अवगत कराया जा रहा है कि मुख्यमंत्री जी द्वारा इस बात पर बल दिया गया है कि मीडिया में सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों एवं उपलब्धियों का विवरण नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण में मीडिया में उपलब्धियों का उल्लेख नहीं हाता है चूंकि मीडिया में इस बात का स्पेस बना रहता है कि जिसके कारण निगेटिविटी के अलावा उपलब्धियों का उल्लेख नहीं होता है। अत: मीडिया में सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों एवं उपलब्धियों को दिए जाने हेतु विशेष बल दिया जाए। आम जनता के असहाय एवं निराश्रति लोगों को 4.60 लाख की पाजिटिव चीजें मीडिया तक नहीं पहुंच पा रही हैं। व्यवस्था का एक निगेटिव पहलू यह है कि मीडिया के लोगों ने ब्लैक मेलिंग करने की परिपाटी बना रखी है।

यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह ने कहा कि अभी तक नियुक्ति विभाग द्वारा जारी किया गया कार्यवृत्त उन्होंने देखा नहीं है। इसलिए कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। यदि ऐसा कोई कार्यवृत्त जारी किया गया है तो पूरी मीडिया को ब्लैकमेलर बताना गलत है। उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा कि यदि ऐसा कोई कार्यवृत्त जारी करके मीडिया को ब्लैकमेलर बताने की कार्यवाही की गई तो निहायत निंदनीय है। लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसियेशन (उपजा) के अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि यदि कोई पत्रकार ब्लैकमेलिंग कर रहा है तो सरकार उसी जांच करवा कर सख्त कार्रवाई करे। सरकार को बदनाम और भ्रमित करने वाले अफसरों की भी जांच हो। आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष के. विक्रमराव का कहना है कि मीडिया को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां हैं। उसको मैं नकारता हूं। अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग मुकुल सिंघल ने कहा कि उन्होंने अभी यह कार्यवृत्त देखा नहीं है। देखकर ही कोई कमेंट कर पाएंगे। अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल से सम्पर्क किए जाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। यही हाल कार्यवाहक मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी का रहा।

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