उत्तर प्रदेशलखनऊ

सड़क पर होगा फ्री परमिट के फैसले का विरोध

सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे 55 हजार कर्मचारी

लखनऊ। केंद्र व प्रदेश सरकार के 22 सीटर वाहनों को परमिट फ्री कर राष्ट्रीयकृत मार्गों पर चलने की छूट दिए जाने के फेसले के खिलाफ परिवहन निगम के हजारों कर्मचारी सड़क पर उतरेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से परिवहन निगम के 55 हजार कर्मियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। सरकार के इस फैसला का पुरजोर विरोध करने का निर्णय कर्मियों ने लिया है। जरूरत पड़ी  तो इस फैसले के खिलाफ सड़क परभी उतरेंगे कर्मचारी। सेंट्रल रीजनल वर्कशॉप कर्मचारी संघ के महामंत्री जसवंत सिंह ने बताया कि वर्ष 1972 में रोडवेज परिषद को तोड़कर परिवहन निगम बनाया गया। निगम के गठन पर शासन ने कार्यरत कार्मिकों व निगम के भविष्य को लेकर समझौता किया गया। समझौते के तहत तय किया गया कि निगम के कार्मिकों के सभी हित लाभ राज्य कर्मचारियों के समान होंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि परिवहन निगम के गठन के समय ही राष्ट्रीयकृत मार्गों को समय-समय पर चिन्हित कर राष्ट्रीयकृत घोषित किए गए। उसी के तहत आज प्रदेश में कुल राष्ट्रीयकृत मार्गों का प्रतिशत 7.8 है। इन्हीं मार्गों पर परिवहन निगम की बसों के संचालन से मिलने वाली आय से सभी खर्च निकाले जाते हैं। वहीं यात्रीकर, रोड टैक्स, हाउस टैक्स मिलाकर कुल 700 करोड़ का राजस्व सरकार को अदा किया जाता है। अब 22 सीटर वाहनों को परमिट फ्री कर राष्ट्रीयकृत मार्गों पर छूट दिए जाने से परिवहन निगम में कार्यरत 55 हजार कर्मियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। इसके खिलाफ संगठन बड़ा आंदोलन करेगा। जरुरत पड़ी तो न्यायालय की भी शरण ली जाएगी। इस फैसले के खिलाफ बीते 24 जनवरी को संगठन की ओर से मुख्यसचिव को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अगर परमिट फ्री की व्यवस्था की गई तो कर्मचारी सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।

 

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