धर्म - अध्यात्म

शिव और शक्ति के मिलन का पर्व है महाशिवरात्रि

शिव यानि कल्याणकारी, शिव यानि बाबा भोलेनाथ, शिव यानि शिवशंकर, शिवशम्भू, शिवजी, नीलकंठ, रूद्र आदि। हिंदू देवी-देवताओं में भगवान शिव शंकर सबसे लोकप्रिय देवता हैं, वे देवों के देव महादेव हैं तो असुरों के राजा भी उनके उपासक रहे। आज भी दुनिया भर में हिंदू धर्म के मानने वालों के लिये भगवान शिव पूज्य हैं।

इनकी लोकप्रियता का कारण है इनकी सरलता। इनकी पूजा आराधना की विधि बहुत सरल मानी जाती है। माना जाता है कि शिव को यदि सच्चे मन से याद कर लिया जाये तो शिव प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा में भी ज्यादा ताम-झाम की जरुरत नहीं होती। ये केवल जलाभिषेक, बिल्वपत्रों को चढ़ाने और रात्रि भर इनका जागरण करने मात्र से मेहरबान हो जाते हैं।

वैसे तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है। हर महीने में मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन साल में शिवरात्रि का मुख्य पर्व जिसे व्यापक रुप से देश भर में मनाया जाता है दो बार आता है। एक फाल्गुन के महीने में तो दूसरा श्रावण मास में। फाल्गुन के महीने की शिवरात्रि को तो महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। और इसका मुहर्त समय 21 फरवरी को सांय 5.20 से 22 फरवरी सांय 7.2 तक है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि के दिन 59 वर्ष के बाद एक विशेष योग बन रहा है, जो साधना सिद्धि के लिए खास महत्व रखता है। जिसके फलस्वरुप इस बार महाशिवरात्रि का महत्व और अधिक हो गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस दिन सृष्टि का प्रारंभ हुआ था महादेव की विशालकाय स्वरूप की उत्पत्ति एक अग्निलिंग के उदय से आरंभ हुई मानी जाती है ।यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह हुआ था, इसलिए शिव पार्वती के मिलन के उत्सव के रूप में भी महाशिवरात्रि मनाई जाती। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर व्रत रखें और सृष्टि के रचयिता, देवो के देव महादेव की श्रद्धा व विधि विधान से पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते है। भगवान शिव के प्रसन्न होने से साधक के कस्ट ओर दुखो का अंत होता है।

शिव और शक्ति की साथ करे पूजा
महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का पर्व है तो ऐसी मान्यता है कि इस दिन महिलाओ को शिव और शक्ति एक साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए। कुंवारी कन्याऐ योग्य वर की और विवाहित महिलाएं संतान और पति की दीर्घायु की कामना से पूजा-अर्चना करती हैं।शिव और शक्ति की सयुक्त रूप से पूजा करने से साधक की मनोकामना पूर्ण होती है।

महाशिवरात्रि के दिन क्या करे?
महाशिवरात्रि के दिन अल सुबह उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, भगवान शिव का स्मरण करें। एवं श्रद्धा से महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात भगवान शिव का ध्यान कर मन को शांत और एकाग्र चित्त रखना चाहिए। ब्रह्मचारी का भाव, स्वस्थ मन और पूरी श्रद्धा, आस्था व गरिमा के साथ बिल्व पत्र अर्पित करते हुवे ॐ नमः शिवाय का मंत्रोचार से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव भक्तों की सच्चे मन से की गई पूजा से खुश होकर उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

अभिषेक करना फलदायक

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश पुजारा (चिड़ावा) के अनुसार महाशिवरात्रि के पावन पर्व के दिन भगवान भोले नाथ का अभिषेक करना बहुत ही शुभ और फलदायक होता है।ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है।धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। सभी रोग,दोष व कस्ट समाप्त होते है।पारिवारिक सुख सम्रद्धि ,संतान की प्राप्ति, यश, वैभव, मान, सम्मान, एवं लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए अभिषेक करना विशेष फलदायक माना जाता है। देवो के देव महादेव बहुत दयालु। ऐसे में इस दिन द्रव से पूजा करने से भगवान शिव की और अधिक कृपा प्राप्त होती है।

द्रव फल
-गंगाजल- सौभाग्यवृद्धि के लिए
-गाय का दूध- ग्रह शान्ति, लक्ष्मी प्राप्ति के लिए
-गाय का घृत-वंश वृद्वि के लिए
-पंचामृत-मनोकामना पूर्ति के लिए
-गन्ने का रस- यश, वैभव प्राप्ति के लिए
-शहद- ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए
-सुगन्धित तेल-भोग प्राप्ति के लिए
ऐसे द्रव से पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।

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