उरई

पिछली वर्ष की तुलना में इस वर्ष दलितों को बजट कम

उरई। यूपी सरकार का यह चौथा सबसे बड़ा बजट 2020-21 का आया है यूपी बजट के विश्लेषण को रखते हुए बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच बहुजन फाउंडेशन के संयोजक संस्थापक कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि वित्त राज्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने 5,12,860.7 करोड़ का बजट पेश किया है। जिसमे अनुसूचित जाति के लिए- 31010.08 करोड़ दिये है, पहले यह बजट प्लान व नॉन प्लान अलग-अलग आता था तो यूपी में दलितों की आवादी के हिसाब से 21 प्रतिश मिलना चाहिए था चुकि अब जब प्लान व नॉनप्लान बजट एक साथ आया है तो इस हिसाब से दलितों को 7.57 प्रतिशत बजट मिलना चाहिए था जो कि 38823.56 करोड़ रूपये मिलने चाहिए था जबकि 31010.08 करोड़ रुपये ही दिया है, इस हिसाब से 7813.48 करोड़ रुपये कम दिया है? वही अनुसूचित जनजातिओं के लिए 1195.97 करोड़ रुपये दिया गया है जो की 67.68 करोड़ रुपये कम दिया गया है।
इस वर्ष के बजट में भूमिसुधार व विजली विभाग में शून्य बजट एलोकेशन किया है जबकि पिछले बजट में इन विभागों को पैसा आवंटित किया गया था?

पिछले वर्ष की तरह से इस वर्ष भी विभिन्न मेडिकल कालेजों के निर्माण व बृहद निर्माण के लिए एससीपी बजट से पैसा बड़े पैमाने पर डायवर्जन किया है जैसे राजकीय मेडिकल कालेज कन्नोज को 81.22 करोड़, मेडिकल कालेज उरई को 67.19 करोड़, सहारनपुर मेडिकल कालेज को 50.34 करोड़, आंबेडकर नगर मेडिकल कालेज को 65.64 करोड़ रुपये दिया गया है वही बृहद निर्माण के कार्यों में भी एससीपी से हजारों करोड़ दुपाये डायवर्जन किया गया है।

जब गाइड लाइन पिछले 40 साल से आई है उसका हिसाब लायेंगे तो बहुत बड़ा आंकड़ा सामने आयेगा? अगर इस वर्ष ही गाइड लाइन के हिसाब से पैसा दलितों के लिए दिया गया होता तो कम से कम 1 लाख से ज्यादा दलित भूमिहीन परिवारों जमीन खरीद कर दी जा सकती, लाखों दलित युवाओं को रोजगार दिया जा सकता, लाखो दलित स्टूडेंट को स्कालरशिप देकर उनकी पढाई जारी रह सकती, मैला ढ़ोने बाले परिवारों का स्थाई पुनर्वासन हो सकता, बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र को मास्टर प्लान के तहत सुखा मुक्त किया जा सकता? अभी टीम दोबारा यह प्राथमिक अनालिसिस बजट का किया गया है विस्तृत व विभागवार एवं योजनाबार बजट का विश्लेषण कर जल्द ही सभी के सामने लाया जायेगा और उस पर पैरवी की जाएगी।

यूपी बजट 2020-21 पर टिप्पणी करते हुए मंच के साथी दीपा, रुकसाना मंसूरी व नंदकुमार, दिलीप वर्मा, दिनेश जैसारी, मनोज चैधरी, कृष्णकुमार ने कहा की सरकार महिलाओं के लिए बड़े बड़े बादे करती है लेकिन बजट में दलित महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं है आज भी हमारी दलित वाल्मीकि महिलाये मैला ढो कर अपने बच्चो का पेट भर परिवार का गुजर बसर करती है, उनका अभी तक पुनर्वासन नहीं हुआ है?

दलित स्टूडेंट को समय से स्कालरशिप नहीं मिलती वही बुंदेलखंड से कई हजार दलित युवा रोजगार की तलाश में पलायन करके दुसरे प्रदेशों में जाते है, आखिर कब सुधरेगी दलितों की हालात जिस प्रकार से बजट की कटोती की जा रही है वो सामाजिक से ज्यादा आर्थिक अत्याचार दलितों के साथ किया जा रहा है जिस पर सबकी चुप्पी बनी हुई है, अब हम सबको मिलकर इस आर्थिक अत्याचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आन्दोलन करना होगा।

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