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सीएए विरोधी हिंसा में 20 लोगों की हुई थी मौत, योगी ने कहा पुलिस के काम की प्रशंसा की जानी चाहिए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विधान सभा में दिये गये एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। सीएम का बयान संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ दिसंबर में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में हुई मौतों पर है। उन्होंने कहा है कि अगर कोई मरने के लिए आ ही रहा है तो वो जिंदा कहां से हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि सीएए विरोधी हिंसा में पुलिस की गोली से उत्तर प्रदेश में किसी की मौत नहीं हुई। उन्होंने कहा सीएए विरोधी हिंसा के दौरान राज्य में कुल 20 लोगों की मौत हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए यह बातें कही। इस दौरान आदित्यनाथ ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो पिछले एक महीने में राज्य में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) का विरोध कर रहे हैं। लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज में इस कानून के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा आजादी के नारे लगाए जा रहे हैं। कौनसी आजादी? क्या हमें जिन्ना (मोहम्मद अली जिन्ना) के सपने के लिए काम करना है या क्या हमें गांधी के सपनों की दिशा में काम करना है? पुलिस को दिसंबर की हिंसा के बाद उनके काम की प्रशंसा की जानी चाहिए।

क्योंकि राज्य में कोई दंगे नहीं हुए। हम लोकतांत्रित तरीके के जरिए किए जाने वाले प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं लेकिन जहां हिंसा होगी वहां पर जो जिस भाषा में समझेगा उसी में समझाएंगे। सीएम के इस बयान पर विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री के बयान ने नागरिक स्वतंत्रता की पूरी तरह से उपेक्षा की है। राज्य पुलिस के व्यवहार में भी इस तरह का रवैया दिखाई देता है।

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