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अगर आपका बैंक दिवालिया या किन्हीं कारणों से डूब जाता है, तो रकम 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गई

नई दिल्ली. पंजाब एंड महारारष्ट्र बैंक मामला [Punjab and Maharashtra Bank case] सामने आने के बाद इस बात की मांग बढ़ गई [Demand increased] थी कि अगर कोई बैंक दिवालिया [No bankrupt] हो जाता है या किन्हीं कारणों से डूब जाता है तो उस बैंक खाताधारकों  को मिलने वाली रकम [Bank account holders] बढ़ा दी जाए. देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक  ने भी अपनी एक रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि बैंक में जमा रकम पर डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  ने बजट भाषण में इसका ऐलान करते हुए कहा कि अब डिपॉजिट इंश्योरेंस के तहत बैंक डूब जाने पर खाताधारक को 5 लाख रुपये दिए जाएंगे.

इसके पहले डिपॉजिट इंश्योरेंस की रकम [Deposit insurance] को 1993 में बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया गया था. इसके करीब 27 साल बाद सरकार ने इस रकम को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है. वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण में इस ऐलान के बाद से ही लोग ये जानना चाहते हैं कि अगर ऐसी कोई परिस्थिति आती है तो क्या उन्हें 1 से अधिक अकाउंट के लिए 5-5 लाख रुपये का डिपॉजिट इंश्योरेंस मिलेगा. आइए जानते हैं इससे जुड़े सवालों के जवाब.

कितने अकाउंट पर मिलेगा डिपॉजिट इंश्योरेंस का लाभ?


​5 लाख रुपये का डिपॉजिट इंश्योरेंस प्रति डिपॉजिटर प्रति बैंक के आधार पर लागू होगा. ऐसे में अगर एक ही बैंक के कई ब्रांच में किसी व्यक्ति के अकाउंट है तो इन ब्रांचेज  में जमा कुल रकम का केवल 5 लाख रुपये ही सुरक्षित रह सकेगा. हालांकि, अगर किसी एक ही व्यक्ति का अकाउंट अलग-अलग बैंक में है तो ऐसी स्थिति में सभी बैंकों के अकाउंट का डिपॉजिट 5 लाख रुपये तक सुरक्षित होगा.

इन अकाउंट्स पर मिलेगा लाभ
बैंक डिपॉजिट में डिपॉजिटर्स के सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि शामिल होगा. ध्यान देने वाली बात है कि 5 लाख रुपये का यह डिपॉजिट आपके द्वारा इन्वेस्ट किए गए प्रिंसिपल अमाउंट के साथ-साथ इस पर मिलने वाले ब्याज भी शामिल होगा.

अगर ज्वाइंट अकांउट है तो क्या होगा?
किसी एक ज्वाइंट अकाउंट को एक ही ईकाई माना जाता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस अकाउंट में कितने लोगों का नाम है. इस एक अकाउंट में 5 लाख रुपये का ही डिपॉजिट इंश्योरेंस बनता है. जानकारों के मुताबिक, ​अगर किसी व्यक्ति ने एक ही अन्य व्यक्ति के साथ 1 से अधिक ज्वाइंट अकाउंट खोल रखा है तो ऐसी परिस्थिति में सभी अकाउंट को मिलाकर केवल 5 लाख रुपये का ही डिपॉजिट सुरक्षित होगा.

किस स्थिति में मिलेगी ये रकम?
डिपॉजिट इंश्योरेंस का लाभ दो परिस्थितियों में मिलती है. पहली तो तब, जब बैंक किन्हीं कारणों से दिवालिया हो जाता है. वहीं दूसरी स्थिति में इस इंश्योंरेंस का लाभ तब मिलेगा, जब बैंक रिकनस्ट्रक्ट या किसी अन्य बैंक के से विलय होता है. जानकारों का कहना है कि DICGC डूब चुके बैंक के डिपॉजिटर्स से सीधे तौर पर संपर्क नहीं करता है.

इसके लिए डिपॉजिटर्स के आधार पर क्लेम लिस्ट तैयार किया जाता है और जांच और पेमेंट के लिए DICGC को भेजा जाता है. यह काम लिक्विडेटर का काम होता है. इसके बाद ​DICGC लिक्विडेटर को क्लेम की रकम भुगतान करता है, जिसके बाद डिपॉजिटर्स तक यह रकम पहुंचाई जाती है.

अगर किसी बैंक का विलय होता है तो ऐसी स्थिति में हर एक डिपॉजिटर की रकम को नए बैंक में ट्रांसफर किया जाता है. हालांकि, ऐसा तभी होता है जब किसी संकट की स्थिति वाले बैंक का विलय होता है. बता दें कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंट कॉरपोरेशन, भारतीय रिजर्व बैंक की एक सहायक ईकाई है. सभी शेड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंक, विदेशी बैंक के भारत में ब्रांच, क्षेत्रीय बैंक और सहकारी बैंक इसके अंतर्गत आते हैं.

बैंकों को दे दी गई है जानकारी
बजट भाषण में ऐलान के बाद डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) ने सभी बैंकों को इस संबंध में जानकारी दे दी है. ​DICGC द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि प्रति 100 रुपये पर प्रीमियम को 12 पैसे कर दिया गया है. यह 1 अप्रैल 2020 से शुरू होने वाली वित्त वर्ष की छमाही से लागू होगा. इस सालाना प्रीमियम को 10 पैसे से बढ़ाकर 12 पैसे कर दिया गया है.

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