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सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा के पद में 74 फीसदी की कटौती

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा (आइआरएस) के अधिकारियों के पदों में भारी कटौती कर दी है। 2014 की तुलना में पदों की संख्या 74 फीसद तक घटा दी गई है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 2013 में 409 आइआरएस अधिकारियों की नियुक्ति की थी। 2018 में यह आंकड़ा घटकर 106 रह गया है। एक अधिकारी के मुताबिक, कंप्यूटरीकरण, डेटा नेटवर्किंग और डिजीटलीकरण के कारण संख्या सीमित की जा रही है। जीएसटी के कारण अधिकारियों का निजी हस्तक्षेप कम हुआ है।

नियुक्तियों के सालाना आंकड़े केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण मंत्रालय ने जारी किए हैं। आइआरएस अधिकारियों की नियुक्ति केंद्रीय करों व आबकारी के मामले देखने वाले विभागों में की जाती है। तुलनात्मक आंकड़ों से पता चलता है कि 2017 में आइआरएस अधिकारियों की संख्या में घटा कर 208 कर दी गई। 2018 की सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में 106 लोग आइआरएस के लिए चुने गए हैं। दरअसल, यूपीएससी के अन्य सेवा वर्गों- आइएएस, आइपीएस और आइएफएस की संख्या में भी गिरावट आती रही है, लेकिन साल-दर-साल यह संख्या कमोबेश स्थिर रही है।

लेकिन आइआरएस की संख्या में गिरावट जबरदस्त हुई है। कार्मिक विभाग में नियुक्तियों से जुड़े अधिकारियों का तर्क है कि वर्ष 2016 तक आइआरएस अधिकारियों के बड़े-बड़े बैच की नियुक्ति दी गई। अब उनकी संख्या संतुलित की जा रही है, क्योंकि आगे चलकर पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक इंतजामों में दिक्कत आएगी। एक आला अधिकारी के मुताबिक, चार-चार सौ अधिकारियों की भर्ती की जाती रही है। अब संख्या में कटौती जरूरी हो गई है, क्योंकि शीर्ष पदों पर हम कुछ ही अधिकारियों को रख सकते हैं। अतीत में आइआरएस अधिकारियों के बड़े बैच की नियुक्ति क्यों की गई? इस बारे में डीओपीटी के अधिकारियों का कहना है कि 2001 में विभागों का पुनर्गठन किया गया था।

2003 के बाद बड़ी संख्या में कराधान एवं आबकारी के लिए पद निकाले गए। तब जरूरत थी। एक दशक के बाद पदों की संख्या बढ़ाने की जरूरत आई, तब नियुक्तियों की संख्या और बढ़ाई गई। अब आलम यह है कि पिछले कुछ साल तक में नियुक्तियां पूरी कर ली गई हैं। इस कारण बेहतर कैडर प्रबंधन की जरूरत है। अधिकारियों के मुताबिक, अब विभागों में स्थिरता की जरूरत है। विचार यह है कि सभी रिक्तियां भरी न जाएं, बेहतर कैडर प्रबंधन किया जाए। दरअसल, आइआरएस अधिकारियों की दो विभागों में नियुक्ति की जाती है – आयकर व आबकारी व केंद्रीय कर। इन विभागों की देखरेख के लिए दो केंद्रीय संस्थाएं हैं- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) व केंद्रीय अप्रत्क्ष कर व आबकारी बोर्ड (सीबीआइसी)।

सीबीडीटी के पास करदाता, करों में धोखाधड़ी और आयकर नियम के मामले हैं। सीबीआइसी के पास वस्तु व सेवा कर और आबकारी से जुड़े मामले हैं। आइआरएस (आयकर) में मंजूर पदों की संख्या 4,914 व आइआरएस (सी एंड सीई) में 5,583 है। कार्मिक मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, आयकर विभाग में निचले स्तर पर संख्या बेहद कम है। ग्रुप ए में अधिकारियों की संख्या ठीक है। इस कारण इस साल 65 रिक्तियां जारी की गई हैं। हालांकि, सरकार के अपने आंकड़े अलग कहानी बयान करते हैं। आइआरएस (आयकर) में मंजूर पदों की संख्या भले 4,914 है, लेकिन अधिकारियों की वास्तविक संख्या 3,216 है। अंतर 3.55 फीसद का है। इसी तरह आइआरएस (सी एंड सीई) में 5,583 की जगह 4,172 नियुक्तियां हुई हैं।

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