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शिक्षा विभाग का तुगलकी फरमान, भारी बारिश में स्कूलों तक तैरकर जाएंगे शिक्षक?

देहरादून। उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग ने मौसम विभाग के अल्टीमेटम को देखते हुए स्कूली बच्चों के लिए तो अवकाश घोषित कर दिया है, लेकिन शिक्षकों को हर हाल में स्कूलों में हाजिरी लगाने जाना होगा। मौजूदा हालात को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि स्कूल तक शिक्षकों को तैर कर ही जाना होगा।

उत्तराखंड में बदस्तूर बारिश का प्रकोप जारी है। पहाड़ी इलाकों पर हो रही लगातार बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आलम यह है कि नदियां और नहरों के उफान पर होने के कारण भूस्खलन और पहाड़ दरकने लगे हैं। स्थिति को गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी बच्चों को स्कूल में नहीं जाने की सलाह दी है। विभाग की ओर शिक्षकों के लिए इस प्रकार का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। ऐसे में हालात जो भी हों, शिक्षकों को स्कूल में हाजिरी लगाने जाना ही पड़ेगा।

बीते दो दिन में हुई बारिश से पहले ही जहां प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड और मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। वहीं, मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए प्रदेशभर में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस कारण स्थिति और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है। पहाड़ के स्कूलों की बात करें तो कई ऐसे स्कूल हैं जहां तक जाने के लिए नदियों और पुलियाओं को पार करके जाना पड़ता है। बारिश में पुलिया क्षतिग्रस्त हो चुकी है, नदियां भी अपने पूरे शबाब पर हैं। जिस कारण स्कूल तक पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में शिक्षक किस प्रकार स्कूलों तक पहुंचेंगे यह एक बड़ा सवाल है। विभाग की ओर से बच्चों द्वारा लिए जाने वाले अवकाश को भी अवकाश नहीं माना जाएगा लेकिन शिक्षकों के लिए इसके लिए भी कोई छूट नहीं दी गई है। शिक्षक नेता इसे विभाग की अनदेखी करार दे रहे हैं।

मामले में शिक्षा विभाग के उपनिदेशक जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि विभाग ने ​बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया है। शिक्षकों की सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए ऐसा कोई आदेश नहीं है लेकिन स्थिति काबू से बाहर होने पर वे अपने उपार्जित या अन्य मद में ​मिलने वाले अवकाश ले सकते हैं।

शिक्षक नेता विरेंद्र कृषाली ने कहा कि शिक्षकों की छुट्टियां उनका निजी अधिकार है। शिक्षक अपनी जरुरत के अनुसार इन अवकाशों का उपयोग करते हैं। पहाड़ पर अगर स्थिति खराब है तो ऐसे में शिक्षकों को भी अवकाश दिया जाना चाहिए था। उन्होंने विभाग पर शिक्षकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभाग को पहाड़ों के दुर्गम इलाकों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए संवेदनशीलता के साथ फैसला किए जाने की मांग की।

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