हाथरस

ये है योगी राज:मरीजों को खुद करना पड़ रहा इलाज

हाथरस। योगी सरकार की लाख सख्ती के बावजूद खुलेआम उड़यी जा रही नियम व कानून की धज्जियां सरकारी डाॅक्टरों की संवेदनहीनता संवेदनशीलता में नहीं बदली है। संवेदनहीनता के हालात यहां तक हैं कि जिला चिकित्सालय में तैनात डाक्टर पहले तो इमरजेंसी तक के लिए भी समय पर मौजूद नहीं हैं। यदा-कदा यदि पहुंच भी गये तो इमरजेंसी में डाॅक्टरों की संवेदनहीनता इस हद तक देखी जा सकती है कि इलाज के लिए आये गंभीर घायलों को खुद इलाज करना पड़ता है।

विडम्बना यह है कि ऐसे में डाॅक्टर यह सब देखकर जरा भी न सकुचते हैं और न ही इलाज के लिए आगे बढ़ते हैं। हां अपना पिंड छुड़ाने के लिए रिफर की प्रक्रिया जरूर अपनाते देखे जा सकते हैं। कुछ ऐसा ही नज़ारा एनएच 93 पर एक्सीडेन्ट का शिकार हुए दम्पत्ति और उनकी बेटी के जिला अस्पताल पहुंचने पर देखने को मिला।

जनपद में एनएच 93 चंदपा थाना क्षेत्र के अन्तर्गत दो बाइकों की टक्कर में तीन लोग गंभीर रूप से हुए घायल हो गये। अपनी पत्नी व बेटी के साथ अलीगढ से आगरा जाते समय एनएच 93 पर चंदपा थाने के पास वाहिद खांन का ऐक्सीडेन्ट हो गया जिसको ऐम्बुलेन्स के माध्यम से जिला चिकित्सालय लाया गया। जब जिला चिकित्सालय की इमर्जेन्सी में गंम्भीर घायल पति पत्नि और बेटी ने डाक्टरों को नहीं पाया और जब डाक्टर आये तो उनके द्वारा इलाज में उदासीनता देखी तो घायल माँ बेटी स्वयं ही अपने पिता और अपना अपनी प्रथमिक उपचार करने में लग गये।

बड़े ही आश्चर्य की बात थी कि गंम्भीर रूप से घायल हेड इन्जरी का शिकार महिला अपने परिजनों का स्वयं इलाज कर रही थी। लेकिन जिला चिकित्सालय के डाक्टरों को जरा सा भी तरस नहीं आया और गंभीर घायल को रैफर कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली।

जब ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से इस सम्बन्ध में बात करनी चाही तो वह कैमरे के सामने आने से बचते रहे। जिला चिकित्सालय के सीएमएस आईबी सिंह से जब इस बारे में बात करने पर पहले तो कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से कतराते रहे। बाद में हमेशा की तरह जांच कराने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया।

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