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सीएम का निर्देश : दीघा-राजीवनगर में सक्रिय भू-माफियाओं के खिलाफ एक्शन लें पुलिस -प्रशासन

लापरवाही बना कारण तो सरकार वसूल करेंगी क्षति -पूर्ति ,और कार्रवाई
>> वर्ष 1972-76 में  बिहार हाउसिंग बोर्ड ने अधिग्रहण किया था 1024 एकड़ जमीन
>> सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1984 में बिहार हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में दिया है फैसला
>> सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने दिया नया फैसला ,पांच साल में अधिग्रहण व कब्जा की हो गयी हैं कार्रवाई तो नहीं माना जाएंगा गलत
>> अधिग्रहण के कार्रवाई बाद जो भी निजी दावा , सब फर्जी ,खरीद -बिक्री करना गैरकानूनी -एसडीओ
रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ द्वारा दिया गया फैसला के बाद बिहार सरकार अधिग्रहण की गयी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही हैं । सीएम नीतीश कुमार ने निर्देश दिया हैं की दीघा-राजीवनगर में सक्रिय भू-माफियाओं के खिलाफ पुलिस -प्रशासन एक्शन लें। सीएम ने गृह विभाग ,डीजीपी ,नगर विकास व आवास विभाग एवं बिहार हाउसिंग बोर्ड को स्पष्ट किया हैं की अगर लापरवाही बरती जाती हैं तो दोषियों पर भी कार्रवाई की जाएं । पुलिस -प्रशासन ,एक बार फिर भू-माफियाओं के खिलाफ सक्रियता से कार्रवाई में जुट गयी हैं ।
करोड़ों की जमीन को लूट रहे भू-माफिया
मुख्यमंत्री को शिकायत मिली हैं की दीघा और राजीवनगर में सरकार द्वारा अधिग्रहण की गयी जमीन को भू-माफिया फर्जी कागजात बनाकर अवैध पूर्वक कब्जा कर करोड़ों रूपये में खरीद -बिक्री कर रहे हैं । भू-माफियाओं को सत्ता -सियासत और भ्रष्ट लोक सेवकों का संरक्षण प्राप्त हैं । अधिग्रहण की गयी भूमि को फर्जीवाड़ा कर अकूत सम्पत्ति बनाया  हैं । बड़े भू-माफिया  ,आज भी बड़े -बड़े भू-खंड पर अवैध कब्जा किये हुये हैं और   20 लाख रूपये से लेकर 65 लाख रूपये तक में फर्जीवड़ा कर बिक्री कर रहे हैं । सरकार ऐसे भू -माफियाओं की सूची तैयार कर रही हैं और ऐसा माना जा रहा हैं की अवैध सम्पत्ति जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती हैं । वही जो लोग अधिग्रहण भूमि पर अवैध निर्माण कर व्यवसायी कार्य कर लाखों -करोड़ों कमा रहे हैं उनका प्रतिष्ठान जल्द बंद किया जा सकता हैं एवं सरकार हरजाना वसूली करने के लिए नियम ला रही हैं ।
दीघा-राजीवनगर में 1024 एकड़ अधिग्रहण
वर्ष 1972-76 में सरकार द्वारा पारित आदेश के आलोक में बिहार हाउसिंग बोर्ड ने 1024 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण की पूर्ण कार्रवाई 5 साल के अंदर पुरी कर ली गयी हैं । अधिग्रहण की कार्रवाई को लेकर किसान पक्ष आपत्ति जताते हुये न्यायालय के शरण में गये । वर्ष 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया की अधिग्रहण की कार्रवाई सही हैं और किसानों के दावे को खारिज कर दिया । फैसले में अवैध अतिक्रमण किये गये कार्रवाई को गलत बताया ।
सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने दिया फैसला ,5 साल के अंदर कार्रवाई को बताया सही
हाल में 6 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरूण मिश्रा के नेतृत्व वाली संविधान पीठ ने अहम फैसला दिया हैं की सरकार अगर 5 साल के अंदर अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्ण कर ली है तो उसे वैध माना जाएंग । अधिग्रहण प्रक्रिया में  5 साल के अंदर कागजी कार्रवाई , मुआवजे की राशि में से अगर एक भी कार्रवाई सरकार ने पूर्ण कर ली हैं तो उसी उचित माना जाएगा । जबकि पूर्व में था दोनों प्रक्रिया 5 साल में अगर पूर्ण नहीं होती है तो अधिग्रहण गलत माना जाएगा । सरकारी रिपोर्ट के अनुसार दीघा-राजीवनगर में अधिग्रहण की कार्रवाई 5 साल में पूर्ण कर ली गयी है । सन् 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया हैं ।
अधिग्रहण के बाद निजी दावा फर्जी ,गैरकानूनी -एसडीओ
बिहार हाउसिंग बोर्ड के एसडीओ प्रकाश चंद्र राजू ने बताया की वर्ष 1972-76 के बीच अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्ण कर ली गयी हैं । कोई भी व्यक्ति या किसान अधिग्रहण भूमि पर निजी दावा करता हैं तो वह गलत हैं । अधिग्रहण भूमि की खरीद -बिक्री करना गैरकानूनी हैं । एसडीओ ने स्पष्ट किया की कोई कॉपरेटिव या निजी व्यक्ति का जमीन नहीं हैं । जो भी अवैध निर्माण करते हैं पकड़े जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएंगी ,किसी को बक्सने का सवाल ही नहीं उठता । हाल ही में मे प्लावर स्कूल के पश्चिम अवैध निर्माण करा रहे तीन भू-माफियाओं के खिलाफ दीघा थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया हैं ।
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