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जो चूक हवाई अड्डों पर, वही अब बस अड्डों पर!

रवि गुप्ता

-रोडवेज बसें तो सैनिटाइज्ड, मास्क भी बंट रहा मगर थर्मल स्कैनिंग नदारद
-बाहरी यात्रियों का दबाव बढ़ा, रोडवेज नहीं रख पा रहा इनका कोई डाटा
-आगे जरूरत पड़ने पर कोरोना संदिग्धों का आंकलन करना होगा कठिन

लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार रात से दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों में फसें यूपी के निवासियों को प्रदेश में लाने के लिए रेस्क्यू आपरेशन संचालित कर रहे हैं। यह काम यूपीएसआरटीसी की 1000 बसों के माध्यम से किया गया। सीएम योगी  दूसरे राज्यों से आए यूपी/बिहार के लोगों के लिए रात भर जगे रहे। रातों रात घरों से जगा कर  परिवहन अधिकारी, ड्राइवर और कंडक्टर को बुलाया गया। रातों रात 1000 बसों का इंतजाम किया गया। सीएम योगी ने रात भर जाग कर नोएडा, गाजियाबाद ,बुलंदशहर, अलीगढ़, हापुड़ आदि इलाकों में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर दिल्ली बॉर्डर पर फंसे लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था कराई। रात में ही इन लोगों और बच्चों के लिए भोजन का इंतजाम भी कराया गया।
वहीं अधिकारी बसों से यूपी आ रहे लोगों के स्वास्थ्य की थर्मल स्कैनर सहित अन्य जरूरी उपकरणों से जांच नहीं कर पा रहें, क्योंकि ऐसी कोई व्यवस्था उनके पास है ही नहीं, जिसके चलते कोरोना संदिग्धों का आंकलन करना बेहद कठिन हो गया है। क्या गारंटी है कि बाहर से आए इन लोगों में कोई भी कोरोना से संक्रमित नहीं है। आपको बता दें कि एयरपोर्ट समेत अन्य परिवहन सुविधाओं का संचालन रोकने के पीछे सरकार की मंशा थी कि कोरोना संक्रमित लोगों के मूवमेंट को रोक जाए। निश्चित रूप से यह प्रशंसनीय है कि यूपी सीएम फंसे लोगो को उनके गन्तव्य तक पहुंचाने के लिए खुद संवेदनशील हैं लेकिन इस आपरेशन में जरूरी स्वास्थ्य जांचों को नजरअंदाज किया गया है। इससे भी हैरानी की बात यह है कि जो भी बाहर से यात्री राजधानी के आलमबाग, चारबाग या फिर कैसरबाग बस अड्डे पहुंच रहें, उनकी न तो थर्मल स्कैनिंग हो पा रही है और न ही प्रदेश के अन्य जनपदों व ग्रामीण क्षेत्रों को रवाना किये जाने वाले इन यात्रियों का कोई डाटा रोडवेज टीम रख पा रही है। सवाल यह है कि अगर आगे इन यात्रियों में से कोई कोरोना संदिग्ध हुआ तो उसे कैसे टेÑस किया जा सकेगा। क्स््

दिल्ली के लोगों ने सुनाई आप बीती
दिल्ली से आए लोगों ने  आपबीती सुनाते हुए बताया कि दिल्ली सरकार ने  पानी, बिजली के कनेक्शन काट दिए। , लाकडाउन के दौरान  भोजन, दूध आदि की भी मदद नहीं मिली। भूखे लोग सड़कों पर उतरे तो दिल्ली सरकार के अधिकारी बकायदा एनाउंसममेंट कर अफवाह फैलाते रहे कि यूपी बार्डर पर बसें खड़ी हैं, जो यूपी और बिहार ले जाएँगी । बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बार्डर तक पहुंचवा कर छोड़ा गया। लाकडाउन और कथित कर्फ़्यू में दिल्ली सरकार की संवेदनहीनता ने कोरोना फैलाने का खतरा बढ़ाया और पूरे देश में लोगों की जान से खिलवाड़ किया है। जबकि मुफ्त बिजली और पानी देने का वायदा करके केजरीवाल ने सत्ता हासिल की है।

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