पटनाबिहार

कोरोना इफेक्ट: इंसान तो इंसान ,जानवरों पर भी बुरा असर ,हो सकती हैं दूध की किल्लत

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । ” कोरोना ” ने पुरे देश -दुनिया में तबाही मचा कर रख दिया हैं । वर्तमान आधुनिक एवं वैज्ञानिक व्यवस्था इसके आगे कमजोर पड़ गयी हैं । भारत की स्वास्थ्य -व्यवस्था दुनिया में 112 वें स्थान पर हैं । ” कोरोना ” के मंजर ने आर्थिक व सर्व सम्पन्न  देश अमेरिका ,इटली , चीन, ईरान , ब्रिटेन आदी के नींव को हिला कर रख दिया हैं । अभी तक कोरोना के तोड़ (दवा ) सामने नहीं आया हैं , मात्र सजगता ( एकांत ) ही इसके संक्रमण का बचाव का उपाय हैं । स्थिति को देखते हुये भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया हैं । 5 वें दिन लॉकडाउन के हुये है इसमें इंसान तो इंसान ,अब जानवरों पर भी बुरा असर पड़ने लगा है । जिसके कारण दूध की किल्लत से भी लोगों को सामना करना पड़ सकता हैं । कोरोना से बचाव को लेकर घर में कैद लोगों को चाय की चुस्की पर भी यथासंभव ग्रहण लग सकता हैं । जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस से लड़ने में चाय और कॉफी प्रभावकारी हैं ।
लॉकडाउन के कारण बंद है खल्ली-चोकर-दारा की दुकानें
कोरोना पर सफलता पाने के लिए सजगता ( सार्वजनिक दूरी ,एकांत ) जरूरी हैं । इसको लेकर पुरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया हैं । अपनी जान, परिवार ,समाज और देश हित में इसका पालन सभी का कर्तव्य बनता हैं वही सरकार का दायित्व बनता हैं की जनता सुरक्षित रहे । सार्वजनिक दूरी बनकर लोग जीने के लिए अनाज ,साग सब्जी और दूध खरीद रहे हैं ,इसकी व्यापक व्यवस्था की गयी हैं ताकि खाद्य पदार्थों की किल्लत नहीं हो। इसके अलावा अन्य दुकानें बंद हैं । सभी व्यवसायी वर्ग इस आपदा में धैर्य बनाएं हुये हैं ।
     दूध की उपयोगिता रोगी ,बच्चे ,बुढे के लिए अनिवार्य हैं ,या कहें तो इस आपदा की घड़ी में दूध अमृत के समान हैं । लेकिन लॉकडाऊन के कारण पशुओं को मिलने वाले आहार खल्ली-चोकर-दारा की दुकानें बंद हैं , जिसके कारण नहीं मिल रही हैं । इसके कारण दूध देने वाली गाय और भैंस दिन, प्रतिदिन दूध कम देना शुरू कर दी हैं । जबकि भारत की जनसंख्या का 60 प्रतिशत लोगों का पेशा कृषि हैं । किसानो के जीवोपार्जन का और आर्थिक मजबूती का सबसे पड़ा साधन पशुपालन हैं । जारी लॉकडाउन में पशुओं की आहार को बिक्री करनेवाले दुकानदारों को छूट देनी चाहिए ताकि दूध की किल्लत नहीं हो सके ।
पशुपालको को रोके नहीं बल्कि करें जागरूक और सजग
पशुपालक दूध का बड़ा कारोबार करते हैं । जो बिहार के आबादी का 30 -40 प्रतिशत हैं । जिस तरह से इंसान को जिंदा रहने के लिए खाद्य पदार्थों की जरूरत हैं ,उसी तरह जानवरों को भी आहार । दूध देने वाली गाय और भैंस तो इंसान के प्रगति हैं । लॉकडाउन में पशुपालको को रोकने के बजाए उसे जागरूक करने और सावधानी के साथ दूध कारोबार जारी रखने में और सुविधाएं देने की जरूरी हैं । ऐसे सरकार ने भी स्पष्ट निर्देश में कहां है की कृषि कार्य बाधित नहीं किया जाएगा ।
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