फतेहपुर

सावधान राशन-भोजन के दान का उतावलापन कहीं लॉकडाऊन का मकसद खत्म न कर दे

ऽ बिना जांच के लोग घूम-घूम कर बस्तियों में कर रहे भोजन-राशन का वितरण
ऽ दानदाताओं व संस्थाओं के सदस्यों का कोरोना वायरस की जांच होना जरूरी
ऽ प्रशासन को करे दान, पंजीकृत सदस्यों से कराया जाय सहयोग

फतेहपुर। गरीब-असहाय की सहायता करना या दान-पुण्य करना भारतीय संस्कृति की विशिष्टता रही है। जब-जब इसकी आवश्यकता पड़ी सहृदय व मानवता के पुजारियों ने हमेशा अपनी बखारी गरीबों के लिए खोल कर उनका सहयोग किया। मौजूदा वक्त सारी दुनिया के साथ देश में कोरोना वायरस की महामारी ने तवाही मचा रखा है। इस महामारी के संक्रमण को रोकने व बचाव के लिए केन्द्र सरकार ने पूरे देश में लॉकडाऊन घोषित कर रखा है जिससे बेरोजगार हुए गरीब व दिहाड़ी मजदूर के समक्ष भोजन के लाले पड़ गये है। इस भयावह स्थित से गरीबों को उबारने के लिए सम्पन्न लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और घर घर जाकर गरीबों को दान देकर उनकी सहायता कर रहे हैं लेकिन इस सहायता ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि यह सहायता का सिलसिला लॉकडाऊन के उद्देश्य को ही न खत्म कर दे।

क्योंकि सहयोग करने वाली परोपकारी संस्थाओं के सदस्य व व्यक्तिगत लोग कोरोना वायरस की जांच व परीक्षण के दायरे में नही लिए गये। यदि किसी एक व्यक्ति को अनजाने में कोरोना वायरस हुआ तो निश्चय ही प्रधानमंत्री द्वारा घोषित लॉकडाऊन का मकसद कोरोना वायरस की कड़ी को तोड़ने के बजाय जोड़ता न चला जाय। इसलिए सहयोग में वितरित किया जा रहा भोजन व राशन सीधे प्रशासन को उपलब्ध करवाया जाना लॉकडाऊन के मकसद के लिए आवश्यक होगा। जिसका वितरण कोरोना वायरस की जांच किये व्यक्तियों से कराया जाना ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लॉकडाऊन के मकसद को पूरा करने में सफल होगा।अन्यथा अनजाने में सहयोग करने वालों की बाढ़ खतरनाक सिद्ध को सकती है।

कोरोना वायरस की महामारी के संक्रमण की भयावह तस्वीर ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी व प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के माथे में चिंता की तरीकों खींच दी हैं। अपनी अवाम् को बचाने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहे हैं। इन प्रयासों को सफल बनाना हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी है। सड़कों में पसरा सन्नाटा निश्चय ही लॉकडाऊन को सफल भी बना रहा है। लॉकडाऊन से उपजी समस्याओं में गरीबों के भोजन की मुख्य रूप से आ रही है। जिसके लिए समाज के दानदाताओं ने बीड़ा उठाया है। हर गांव, हर गली, हर गरीब बस्ती, हर चौराहों पर लंच पैकेट बांट कर लोग पुण्य अर्जित कर रहे है। दान-दाताओं के बाढ़ सी आ गयी है। खास बात यह कि समाचार पत्रों की सुर्खियां बनने का मकसद ज्यादा दिखाई दे रहा है हर व्यक्ति अपने दान को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया में प्रसारित कर खूब वाहवाही बटोर कर खुश हो रहा है। लेकिन इस तरह की समाज सेवा से सरकार व प्रशासन को सावधान होने की जरूरत है। और दानदाताओं को भी लॉकडाऊन के मकसद को ध्यान में रखकर सरकार या प्रशासन के माध्यम से दान देने के लिए आगे आना चाहिए।

गुप्त दान महादान दान
दान के विषय में एक कहावत से कि गुप्त में दिये गये दान से बड़ा पुण्य कोई नहीं होता। इसलिए दान देना मकसद होना चाहिए न कि समाचार पत्रों की सुर्खियां बटोरना। जो दान दिखा कर दिया जाता है वह दान ऊपर वाला कबूल नहीं करता न ही उसका पुण्य प्रतिफलित होता है। इसलिए गुप्त दान महाकल्याण को चरितार्थ करके सरकार या प्रशासन द्वारा जारी खातों में ही दान करना उचित होगा।

कोरोना वायरस निगेटिव घोषित व्यक्तियों से बँटवाया जाय भोजन व लंच पैकेट
यदि कोरोना वायरस के संक्रमण रोकने के लिए घोषित लॉकडाऊन को पूर्णतया सफल बनाना है तो कोरोना वायरस जांच कर निगेटिव घोषित व्यक्ति ही से भोजन व लंच पैकेट बंटवाये जाने की जरूरत है। अन्यथा अप्रत्यक्ष व अनजाने में बीमारी के बढ़ने में सहयोग हो सकता है। कहीं पॉजिटिव की संख्या घटने के बजाय बढ़ती न जाय।

खाना बनाने का शौक है तो किचेन में बिताएं कुछ वक्त
यदि आपको घर पर ही रहना है तो अपने शौक को जिन्दा रखिये। अगर खाना बनाने का शौक है तो अपने हाथों से कुछ नई डिश बनायें और अपनों के साथ शेयर करें। ऐसा करने से जहाँ अपनापन बढेगा वहीँ आपका वक्त भी बोरियत भरा नहीं होगा। इसके साथ ही यह भी ख्याल रखें कि हर काम में साफ़-सफाई बरतने के साथ ही ऐसा ही डिश बनायें जो लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला हो, क्योंकि कोरोना की गिरफ्त में सबसे पहले वही आते हैं जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

मनपसंद सीरियल व फ़िल्में देखें, पुस्तकें पढ़ें : कोरोना के चलते घर पर ही समय बिता रहे कुछ नौकरी-पेशा व व्यापारियों से बात की तो उनका कहना था कि जो परिस्थितियां सामने हैं वैसे में हर किसी को बहुत ही धैर्य और संयम की जरूरत है । कोरोना से ध्यान हटाने के लिए किसी ने टीवी पर समाचार देखने के अलावा मनपसंद धारावाहिक देखने की बात बताई तो किसी का कहना था कि वह पेन ड्राइव में पडीं कुछ उन फिल्मों को देखा जो उनके दौर की सुपर हिट हुआ करती थीं । एक युवक का कहना था कि समयाभाव के चलते सेल्फ में रखीं कुछ मनपसंद पुस्तकों को पढ़ नहीं पाया था, अब दिनचर्या में आये बदलाव के चलते उन पुस्तकों को पढ़कर समय व्यतीत कर रहा हूँ। एक बुजुर्ग का कहना था कि खाली वक्त में बहुत दिन बाद बेटे और बेटी की शादी की फिल्म देखी जिसने सभी की यादें ताजा कर दीं।

loading...
Loading...

Related Articles