बिहार

लॉकडाउन में बाहर से आने वाली भीड़ ने बिहार में बढ़ायी चिंता

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी ही एक मात्र और बेहतर उपाय बताया जा रहा है। पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी मकसद से की है। ऐसे में यूपी और दिल्ली सरकार के फैसले से बिहार में नया संकट उत्पन्न हो गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बसों में भरकर बिहारवासियों को उनके अपने प्रदेश में भेजने का फैसला लॉकडाउन का सीधा उल्लंघन तो है हीं, साथ-ही-साथ इससे सोशल डिस्र्टेंंसग का आह्वान भी नकारा हो गया है। बाहर से आनेवाली इस भीड़ ने बिहार र्की ंचता बढ़ा दी है।

दरअसल जो मजदूर खासकर दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा से बसों में लदकर बिहार के चारों ओर पहुंच रहे हैं, वे भी मजबूर थे। उनके मकान मालिकों ने उनके घर का पानी और बिजली का कनेक्शन काट दिया था। पानी के बिना एक दिन भी काटना मुश्किल था। ऐसे में उनका मकान खाली करना स्वाभाविक था। पर, उत्तर प्रदेश सरकार ऐसी परिस्थिति में लोगों को वहीं पर राहत शिविर बनाकर सोशल डिस्र्टेंंसग का ध्यान रखते हुए रख सकती थी। जहां, पर उन्हें खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था रहती। बिहार सरकार ऐसा कर भी रही है। पर अचानक उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले से बिहार में नया संकट पैदा हो गया है।

लोगों र्की चिंता यह है कि उस भीड़ में अगर दो-चार भी कोरोना वायरस से संक्रमित होंगे तो संकट का दायरा अप्रत्याशित हो जाएगा। इस स्थिति में कोरोना बिहार के लिए अभिशाप बन सकता है। ताजा उदाहरण अमेरिका और इटली जैसे विकसित देश हैं। वहां पर परिवहन सेवा को संक्रमण के फैलने के बाद भी कई दिनों तक बंद नहीं किया गया और कोरोना ने कहर बरपा दिया। हजारों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं। ऐसे में बसों में लोगों को भेजने का फैसला लोगों की जान से खिलवाड़ है। उनमें आपस में भी कोरोना वायरस के फैलने का खतरा है। वह भी तब, जब आने वाली भीड़ में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।  रविवार से उत्तर प्रदेश से सटे सीमाओं पर लोग पहुंचने लगे हैं।

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