खेती - बारी

तुलसी की आर्गनिक जैविक खेती

तुलसी की खेती उन इलाके के किसानों लिए वरदान साबित हो सकती है जिन इलाकों में कम उपजाऊ वाली दोमट मिट्टी है यह ध्यान रखना जरुरी है कि तुलसी के खेत में जल निकास का अच्छा प्रबंध होना अनिवार्य है पाले को छोड़कर तुलसी की खेती के लिए खेत की तैयारी जून के महीने में कर लेनी चाहिए तुलसी के पौध बनाने के लिए बीज की बुवाई की जाती है खेत को 15 से 20 से.मी. गहरी खुदाई कर – खर पतवार निकाल देना चाहिए उसके बाद प्रति हेक्टेयर 15 – 20 गोबर की खाद खेत में सामान मात्रा में बिखेर कर खेत की जुताई कर गोबर कि खाद डालनी चाहिए इसके बाद खेत कि सतह से थोड़ी ऊंची एक मीटर लम्बी चौड़ी क्यारी बना लेनी चाहिए 40 -50 किलो आर्गनिक का मिश्रण क्यारिओं में सामान मात्रा में बिखेर कर गुड़ाई कर देनी चाहिए।
आर्गनिक जैविक खाद
प्रति 20- 25 हेक्टेयर सड़ी हुयी खाद खेत में सामान मात्रा में बिखेर कर जुताई कर खेत तैयार कर क्यारियां बना कर आर्गनिक खाद 2 बैग माइक्रो फर्टी सिटी कम्पोस्ट 40 किलो ग्राम, 2 बैग भू पावर वजन 50 किलो ग्राम, 2 बैग माइक्रो भू टनगोबर पावर वजन 10 किलो ग्राम, 2 बैग सुपर गोल्ड कैलसी फर्ट 10 किलो ग्राम, 2 बैग माइक्रो नीम वजन वजन 20 किलो ग्राम और 50 किलो ग्राम अरंडी कि खली इन सब खादों का मिश्रण बनाकर क्यारियों में (1 मीटर लम्बाई और चौड़ाई ) 20-25 किलो ग्राम प्रति क्यारियों में सामान मात्रा में बिखेर कर गुड़ाई कर रोपाई करे जब फसल बुवाई के 20 – 25 दिन बाद 2 किलो सुपर गोल्ड मैग्नीशियम और 500 मिली लीटर माइक्रो झाइम 400 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर मिलाकर तर बतर कर पम्प द्वारा छिड़काव करते है। रोपाई के 25 – 30 दिन बाद दूसरा छिड़काव करते है।
बीज की मात्रा
एक हेक्टेयर जमीन में बुवाई के लिए एक से दो किलो ग्राम बीज बहुत होता है या पर्याप्त होता है इसकी बुवाई के लिए एक किलो ग्राम बीज के साथ दस किलो ग्राम बालू मिलाना चाहिए इसकी खेत में बुवाई की जाये बुवाई के 20 – 25 दिन बाद माइक्रो झाइम 500 मी.ली. और 2 किलो सुपर गोल्ड मैग्नीशियम 400 लीटर पानी में मिलाकर अच्छी तरह घोलकर तर बतर कर छिड़काव करते है।
रोपाई 
30-35 दिन बाद पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए लाइन से लाइन के बीच की दूरी 60 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 30 से.मी. होनी चाहिए।
सिंचाई
रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करनी चाहिए वर्षा काल में सिंचाई की आश्यकता नहीं होती सूखे की स्थिति में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करना चाहिए।
कटाई
फसल की पहली कटाई निराई – गुड़ाई करने के 30-35 दिन बाद करनी चाहिए जब पौधे में पूरी तरह फूल आ जाएं एवं पत्तियां झडऩे लगे तो समझ लेना चाहिए की फसल कटाई के लिए तैयार है।
तेल निकालने की विधि
तुलसी का तेल मुख्यत: उसकी पत्तियों से निकालता है खेत से तुलसी के पौधे निकालने के बाद उसकी पत्तियां अलग कर ली जाती है पत्तियों से तेल निकालने के लिए आसवन विधि होती है जल आसवन या वाष्प आसवन से तेल निकाल लिया जाता है वाष्प आसवन विधि से पत्तियों को पानी में उबाला जाता है उबलने पर पत्तियों का तेल पानी के ऊपर तैरने लगता है इस तेल को एकत्रित कर लिया जाता है वाष्प आसवन सबसे ज्यादा होती है याद रहे कि कटाई के चार – पांच घंटे तक पौधों को खेत में ही छोड़ देना चाहिए इससे आसवन में सुविधा होती है।
व्यावसायिक पहलू
तुलसी की खेती में करीब 8000 रुपये प्रति हेक्टेयर खर्चा आता है इसमे 1000 से 1200 का खर्च आता है खेत तैयार करने पर एक हेक्टेयर बीज बुवाई 300 रुपये और आर्गनिक खादों में 1500 रुपये खर्च आता है पौध की तैयारी, रोपाई और कटाई में रुपये 600रुपये और आसवन हेतु 1800 रुपये प्रति हेक्टेयर की लगात आती है इसके अलावा निराई-गुड़ाई पर 1200 रुपये खर्च करने पड़ते है इस तरह एक हेक्टेयर जमीन में तुलसी की खेती में करीब 8000 से 10000 रुपये कि लागत आती है।
उपज
एक हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 200 – 300 तुलसी की पत्तियां मिल जाती है इससे आसवन विधि से 60 से 80 किलो ग्राम तेल निकलता है। बाजार में तुलसी का तेल 200 से 250 रुपये किलो बिकता है इस हिसाब से करीब 15000 से 20000 रुपये की आमदनी तेल की बिक्री से हो सकती है इस तरह से किसानों को 7000 से 12000 हजार प्रति हेक्टेयर आमदनी होगी।

 

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