Saturday, January 16, 2021 at 12:19 PM

जयंती विशेष: जानिए डॉ. बीआर अंबेडकर के जीवन से जुड़ी रोचक बातें

नई दिल्ली: डॉ. भीमराव अंबेडकर को जीवन में कई कठिनाइयों को का सामना करना पड़ा था। वह लगातार गरीबों, दलितों और शोषितों की आवाज बन कर उभरे। 14 अप्रैल को उनका जन्मदिन मनाया जाता है। वह पहले ऐसे दलित थे, जो मुंबई के एल्फिंस्टन हाई स्कूल में पढ़ने गए।

अंबेडकर ने मुंबई यूनिवर्सिटी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी शिक्षा ली। फिर वह पूरी तरह से लोगों को जागरूक करने में जुट गए। भारत लौटकर दलित बौद्ध आंदोलन से जुड़े और 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार किया। डॉक्टर अंबेडकर को मरणोपरांत 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
उन्होंने 1908 में एल्फिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया। 1912 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान में डिग्री हासिल की। उन्हें सयाजीराव गायकवाड़ द्वारा स्थापित योजना के तहत बड़ौदा राज्य छात्रवृत्ति मिली और अर्थशास्त्र का आगे का अध्ययन करने के लिए उन्होंने न्यूयॉर्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया।
बीआर अंबेडकर से जुड़ी 5 जगहों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ये हैं-

महू, मध्य प्रदेश (जन्म स्थान)।
लंदन यू.के. में अध्ययन के दौरान उनका निवास स्थान।
दीक्षा भूमि, नागपुर वह स्थान जहां उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।
चैत्य भूमि, मुबंई में स्थित उनका स्मारक।
महापरिनिर्वाण स्थल, दिल्ली, जहां उनका परिनिर्वाण हुआ।

15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हुआ तो कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार ने डॉ. अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री के रूप में कार्य करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। वह आजाद भारत के पहले कानून मंत्री बने। 1947 में ही 29 अगस्त को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। डॉक्टर अंबेडकर बचपन से ही मेधावी छात्र थे। डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की जाति महार होने के कारण उन्हें भेदभाव को शिकार होना पड़ा। उनका भी बाल विवाह हुआ था। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 15 साल की उम्र में अप्रैल 1906 में उनका विवाह रमाबाई से करा दिया गया। तब रमाबाई महज 9 बर्ष की थीं। उस समय डॉक्टर अंबेडकर पांचवी कक्षा में पढ़ रहे थे।

स्कूल में उन्हें कक्षा के बाहर खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। स्कूल में उन्हें पानी पीने का भी अधिकार नहीं था। उन्हें प्यास लगने पर दूर से ही पीने दिया जाता था। इस तरह के अनुभवों ने डॉक्टर अंबेडकर के बाल मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। छोटी जाति और गरीब होने के कारण डॉक्टर अंबेडकर ने बहुत पीड़ा सही। लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार लगे रहे।
डॉक्टर अंबेडकर के पिता एक सैनिक थे। 1894 में वे सेवानिवृत्त हो गए और इसके दो साल बाद ही डॉक्टर अंबेडकर की मां की भी मृत्यु हो गई। ऐसे में उनके सामने बच्चों की देखभाल की समस्या खड़ी हो गई। लेकिन इस दौरान विषम परिस्थितियों में रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियां मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए। अपने भाइयों और बहनों मे डॉक्टर अंबेडकर ही स्कूली शिक्षा प्राप्त किए थे।
डॉक्टर अंबेडकर की तबीयत 1954 में बिगड़ने लगी। उन्हें मधुमेह बीमारी थी, जिस कारण उन्हें परेशानियां होने लगी थीं। 6 दिसंबर 1956 को डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की मृत्यु हो गई। इस दिन को परिनिर्माण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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