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कोरोना वायरस के खिलाफ भारत के पहले ड्रग ट्रायल को मिली मंजूरी

नयी दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ भारत इस हफ्ते पहला ड्रग ट्रायल करने जा रहा है। देश के शीर्ष दवा नियंत्रक की तरफ से मंगलवार को इसके लिए मंजूरी दे दी गयी। इस ट्रायल में भारत में बनी एक मौजूदा दवाई ‘माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू’ का कोरोना के ऐसे बेहद गंभीर मरीजाें पर प्रभाव देखा जाएगा, जो आईसीयू में वेंटिलेटर पर हैं। पीजीआई चंडीगढ़, एम्स दिल्ली और भोपाल को इस ट्रायल के लिए चुना गया है। तीनों जगह 40-40 मरीजों को इस ट्रायल में शामिल किया जाएगा।

सीएसआईआर यानी वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की एक पहल के तहत कैडिला फार्मास्युटिकल अहमदाबाद ने 2007 में यह दवाई बनाई थी। ‘ग्राम नेगेटिव सेप्सिस’ के मरीजों में मृत्यु दर घटाने के लिए दुनियाभर में यह एकमात्र स्वीकृत दवाई है और इसके रोगियों पर इस दवा का परीक्षण सुरक्षित पाया जा चुका है।

सीएसआईआर के डायरेक्टर जनरल डॉ. शेखर मांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘ग्राम नेगेटिव सेप्सिस के मरीजों में इस दवाई के परिणाम बेहद अच्छे हैं और ऐसे रोगियों में यह मृत्यु दर 50 फीसदी तक कम करती है। यह दवाई शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि यह कोरोना के बेहद गंभीर मरीजों की मृत्यु दर को भी कम करेगी। सारी मंजूरियां मिल गयी हैं। हम इसी हफ्ते ट्रायल शुरू करेंगे। यह भारत के लिए बड़ा दिन है।’

बन सकती है जीवन रक्षक
पीजीआई चंडीगढ़ के डायरेक्टर जगत राम ने कहा, ‘यदि यह भारतीय दवा कोरोना मरीजों की मृत्यु दर कम करने में कारगर पायी गयी तो यह दुनियाभर में लाखों लोगों के लिए जीवन रक्षक बन जाएगी। यह संभवत: उतनी ही बड़ी खोज हो सकती है, जितनी टीबी की दवा थी।’

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