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लॉकडाउन में क्राइम हुआ क्वारंटाइन


बाल मुकुन्द ओझा

देश में एक ओर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है वहीं कुछ अच्छी खबरें भी सामने आयी हैं। प्रदूषण घटने और ओजोन लेयर के रिपेयर होने की अच्छी रिपोर्ट सामने आने के साथ देश में अपराध का ग्राफ भी नीचे गिरा है। लोक डाउन से कामकाजी जिंदगी में काफी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

जन जीवन घरों में बंद है। देश में हर दिन सड़क दुर्घटना, आत्महत्या, आपराधिक वारदातों वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण, सहित गंभीर बीमारियों व अन्य कारणों से होने वाली मौतों में कमी आयी हैं।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन के बाद ऐसा लगता है अपराधी भूमिगत हो गए हैं। कल तक जो दहशत फैला रहे थे, आज वे कोरोना के खौफ से खुद सहमे दिख रहे हैं। जिससे देशभर में शान्ति व्यवस्था कायम है। दुनिया को डराने वाले कोरोना वायरस का खौफ सिर्फ आम लोगों को नहीं है बल्कि अपराधी भी इससे खौफजदा हैं।
लॉकडाउन की वजह से दुर्घटनाओं व सड़क हादसों में कमी आई है।

सेव लाइफ फाउंडेशन के अनुसार, देश में हर दिन औसतन 415 लोगों की अकाल मौत होती है। इस भांति साल में करीब डेढ़ लाख से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौत होती है। लोक डाउन से सड़क हादसों में काफी हद तक गिरावट आई है। लॉकडाउन का एक माह पूरा हो चुका है। लोग घरों में बंद है, सड़कें वीरान हैं। रेलवे, बस स्टैंड, बाजार, दुकानें, शॉपिंग मॉल आदि सभी कुछ बंद है। लगातार बंद के कारण विभिन्न अपराधों में कमी आई है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अनुसार हार्ट अटैक में काफी कमी देखने को मिल रही है। पहले हर दिन एम्स में 25-30 मरीज आते थे, लेकिन 10 या 15 आ रहे हैं। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के मुताबिक 12 से 15 मरीज हर रोज की तुलना में अब दो या तीन पर आंकड़ा पहुंच गया है।

एक अध्ययन के अनुसार 2017 में वायु प्रदूषण से 12.4 लाख लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, गाजियाबाद, गुड़गांव और नोएडा सहित देश के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर 300 एक्यूआई से भी ज्यादा होता है लेकिन लॉकडाउन होने के बाद इसमें कमी आई है।

मौसम विभाग के अनुसार इन शहरों में प्रदूषण का औसत स्तर 80 से 100 के बीच दर्ज किया है। साफ सुथरी हवा का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में सालाना आग की 30 हजार से ज्यादा घटनाएं होती हैं जिसमें 250 से 350 तक लोगों की मौत होती है। साथ ही डेढ़ से दो हजार लोग घायल होते हैं लेकिन फरवरी से मार्च में अग्निशमन विभाग ने 40 फीसदी तक कमी दर्ज की है। जबकि अप्रैल माह में बीते 23 दिन में 6 से आठ कॉल ही मिली हैं।

लॉकडाउन के कारण आर्थिक हालात खराब हो सकते हैं। मगर इससे कुछ अच्छे और सकारात्मक असर भी दिखाई दे रहे हैं, पर्यावरण का स्वस्थ हों रहा है और हवा साफ है और नदियां बेहद निर्मल हैं।

राष्ट्रीय अपराध शाखा रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में हर साल करीब 30 हजार लोगों की हत्या के मामले दर्ज किए जाते हैं। साल में करीब 1 लाख से अधिक आत्महत्याएं भी दर्ज की जाती हैं। फिलहाल फरवरी से लेकर अब तक इनमें काफी हद तक कमी आई है। अनुमान है कि इन तीन महीनों में हत्या के दर्ज मामलों में 50 फीसदी तक कमी आई है।

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