Thursday, October 1, 2020 at 5:56 AM

कोरोना संकट के समय में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का औचित्य

डॉ रामेश्वर मिश्र

आज कोरोना संकट ने वैश्विक जगत की अंतरात्मा को झगझोर दिया है, विश्व के कई बड़े देश आज इस महामारी के आगे नतमस्तक हो चुके हैं, अब तक की सबसे बड़ी जानलेवा महामारी से वर्तमान विश्व संघर्ष कर रहा है, ऐसे में हमारे देश को भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना स्वाभाविक ही है। कोरोना के संकट से उत्पन्न महामारी ने हमें हर स्तर पर संकट की ओर मोड़ दिया है, चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, अर्थव्यवस्था हो, रोजगार का क्षेत्र हो, भुखमरी और गरीबी का क्षेत्र हो, इन सब क्षेत्रों में कोरोना ने जोरदार संकट उत्पन्न किया है।

इन सब के बीच पहले से ही लड़खड़ा रही भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना की महामारी ने और भी घातक आघात पहुँचाया है जिससे काफी हद तक अर्थव्यवस्था जमींदोह हो गयी है और सरकार द्वारा इस संकट की घड़ी में अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए आर्थिक आपात के सिद्धांत का पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी ने देश की जनता से कोरोना की महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड में दान करने की अपील की जिसका प्रतिफल यह हुआ कि अनेक बड़े उद्योगपतियों के साथ-साथ सिनेमा जगत के कई कलाकार, खेल जगत के साथ-साथ आम जनमानस ने सहयोग किया।

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस 06 अप्रैल को प्रधानमंत्री जी ने अपने सम्बोधन में देश की महिलाओं के पूर्व में किये गए बलिदानों का जिक्र करते हुआ कहा कि संकट की घड़ी में महिलाओं ने अपने मंगलसूत्र तक बेच दिए हैं और इस संकट की घड़ी में भी महिलाओं को आगे आना चाहिए परन्तु इन सब कार्यों के बीच हमारा ध्यान विपक्ष द्वारा दिए गए सुझावों पर जाता है जिसका जिक्र आये दिन विपक्ष द्वारा किया जा रहा है।

कांग्रेस की कार्यकारिणी राष्ट्रीय अध्यक्षा माननीय सोनिया गाँधी जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आर्थिक संकट से निकलने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे जिसमे सोनिया गांधी ने लिखा है कि “20 हजार करोड़ रु. की लागत से बनाए जा रहे सेंट्रल विस्टा ब्यूटीफिकेशन एवं कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को स्थगित किया जाए, मौजूदा स्थिति में विलासिता पर किया जाने वाला यह खर्च व्यर्थ है, मुझे विश्वास है कि संसद मौजूदा भवन से ही अपना संपूर्ण कार्य कर सकती है, नई संसद व उसके नए कार्यालयों के निर्माण की आज की आपातकालीन स्थिति में जरूरत नहीं है, ऐसे संकट के समय में इस खर्च को टाला जा सकता है, इससे बचाई गई राशि का उपयोग नए अस्पतालों व डायग्नोस्टिक सुविधाओं के निर्माण तथा अग्रिम कतार में रहकर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को पर्सनल प्रोटेक्शन ईक्विपमेंट (पीपीई) किट एवं बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जाए” ऐसे में हमें यह जानना आवश्यक हो जाता है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट क्या है ?

असल में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट सरकार की सौन्दर्यीकरण हेतु एक परियोजना है जिसके अन्तर्गत नया त्रिकोणीय संसद भवन, कॉमन केंद्रीय सचिवालय और तीन किलोमीटर लंबे राजपथ को रीडेवलप किया जाएगा जिसमे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को उसके वर्तमान स्थल से कहीं और स्थानांतरित किया जा सकता है।

इसके साथ ही इस योजना के अनुसार विभिन्न मंत्रालयों के लिए एक साझा केंद्रीय सचिवालय निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की इमारत के अलावा उद्योग भवन, निर्माण भवन, शास्त्री भवन, उपराष्ट्रपति आवास सहित नौ अन्य इमारतों को ध्वस्त किये जाने की योजना है जिसे सरकार ने 1300 आपत्तियों के बावजूद भी 03 मई को स्वीकृति दे दी। क्या ऐसे समय में इस प्रोजेक्ट का औचित्य हमारे देश में है ? यह एक गम्भीर सवाल बन जाता है, जिस देश में अभी भी बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास जीवन जीने के लिए मूलभूत सेवाओं का अभाव है वहाँ ऐसे प्रोजेक्ट का क्या औचित्य? इसके साथ हमारा ध्यान इस ओर भी जाता है कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जहाँ हर राज्य के मुख्यमंत्रियों ने मुख्यमंत्री केयर फंड की स्थापना की है जिसमे देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना संकट से लड़ने के लिए यूपी कोविड केयर फंड के लिए एक हजार करोड़ रूपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, इसी तरह लगभग हर राज्यों द्वारा भी कोरोना संकट से उबरने हेतु एक निश्चित फंड जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ऐसे में हमें यह विचार करना चाहिए कि जहाँ उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य द्वारा महज एक हजार करोड़ कोरोना संकट से लड़ने हेतु यूपी कोविड केयर फंड में जुटाने का लक्ष्य रखा गया है वहाँ ऐसे संकट की घड़ी में 20 हजार करोड़ के लागत की सौन्दर्यीकरण हेतु सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की स्वीकृति क्या न्यायोचित है? क्या वर्तमान समय में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के स्थगन का सोनिया गाँधी का सुझाव प्रासंगिक नही था?

भारत आज कोरोना संक्रमण की दृष्टि से विश्व की 15 देशों की सूची में सम्मिलित हो चुका है और फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात सामने आई है। इस रिपोर्ट की मानें तो कोरोना से जंग लड़ने वाले 40 देशों की लिस्ट में भारत का कहीं भी नाम नहीं है, हैरानी की बात तो ये है कि कतर, ओमान, तुर्की और मलेशिया जैसे छोटे देश भी भारत से बेहतर काम कर रहे हैं। एशियाई विकास बैंक ने कोरोना से मदद के लिए भारत को 1.5 अरब डॉलर लगभग ग्यारह हजार चार सौ करोड़ का ऋण देने का ऐलान किया है और सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 01 जनवरी 2020 से 01 जुलाई 2021 तक रोकने का निर्णय लिया गया, इसके साथ ही साथ जनप्रतिनिधियों के दो साल की निधि को भी रोकने का बड़ा निर्णय लिया गया जो कमजोर अर्थव्यवस्था की ओर इशारा करता है।

आज हमारे देश में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, कोरोना संकट से लड़ने हेतु टेस्टिंग किट का अभाव है, कोरोना के कर्मवीर योद्धाओं हेतु पीपीई किट की कमी के साथ-साथ आदि अनेक ऐसे तथ्य हैं जो सेंट्रल विस्टा सरीखे प्रोजेक्ट के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह लगाते  हैं। क्या यह हमारे देश में वर्तमान समय में प्रासंगिक है? सरकार को इस प्रकार की परियोजनाओं पर पुनः विचार करना चाहिए।

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