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यूपी 112 मुख्यालय का दावा : लॉकडाउन में 800 खतरनाक वन्य जीव रिहायशी इलाकों में पहुंचे

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के नवकुर गांव में सात मई की शाम को एक मादा बारहसिंघा भटकते हुए पहुंच गई, जिसे कुत्तों ने घायल कर दिया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस की आपात सेवा 112 को दी। कुछ ही देर में पीआरवी 2052 पर तैनात पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे और घायल बारहसिंघा को कब्जे में ले लिया। उसे उपचार के लिए वे जिला पशु चिकित्सालय ले कर गए। ये तो एक बानगी भर है। लॉकडाउन में 800 खतरनाक वन्य जीव रिहायशी इलाकों में पहुंचे। सूचना मिलने पर 112 के पुलिस कर्मियों ने मौके पर पहुंच कर वन विभाग की मदद से उन्हें कब्जे में लिया।

यूपी 112 मुख्यालय के अनुसार लॉकडाउन के डेढ़ महीने के दौरान वन्य जीवों से संबंधित सूचनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। अप्रैल महीने में 112 को करीब 7000 सूचनाएं मिली हैं, वहीं फरवरी में यह आंकड़ा 4700 के करीब था। लॉकडाउन के दौरान 112 को कुल 11 हजार सूचनाएं मिलीं। आंकड़ों से ऐसा लगता है कि लॉकडाउन के दौरान शहर हो या देहात लोग घरों में हैं, किसान खेतों में भी कम जा रहे हैं, जिसके चलते वन्य जीव वन क्षेत्र से निकल कर बिना किसी खलल के आसानी से आबादी तक पहुंच रहे हैं।

लॉकडाउन के दौरान 112 के पुलिसकर्मियों ने पूरे प्रदेश में 4000 घायल पशुओं को मदद पहुंचाई। यूपी 112 ने आगरा जिले में सबसे अधिक 338 घायल पशुओं की मदद की। दूसरे नंबर पर लखनऊ रहा, जहां 198 पशुओं को 112 ने मदद की। डेढ़ महीने के दौरान पशुओं के रिहायशी इलाकों में पहुंच कर उपद्रव करने की 575 घटनाएं सामने आईं। खतरनाक वन्य जीवों के आबादी में आने की सबसे अधिक सूचनाएं लखनऊ जिले से 112 को मिलीं। लॉकडाउन के दौरान तस्करी कर ले जाए जा रहे 11 प्रतिबंधित वन्य जीवों को भी 112 की पीआरवी ने बरामद कर वन विभाग को सौंपा।

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