बिहार

माहवारी स्वच्छता के महत्त्व को समुदाय में उजागर कर रहीं हैं मालो देवी

Malo Devi is highlighting the importance of menstrual hygiene in the community

रूपेश रंजन सिन्हा

पटना। प्रत्येक साल 28 मई को माहवारी स्वच्छता पर महिलाओं एवं किशोरियों को जागरूक करने के उद्देश्य से माहवारी स्वच्छता दिवस का आयोजन होता है. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर इस वर्ष जिले में कोई विशेष आयोजन नहीं होगा. लेकिन इस संक्रमण काल में भी जिले के संपतचक प्रखंड के बहुआरा स्वास्थ्य उपकेन्द्र से जुडी आशा मालो देवी माहवारी स्वच्छता पर महिलाओं को जागरूक करने की मुहिम जारी रखी हुयी हैं।

स्वच्छता प्रहरी के रूप में बनायीं अपनी पहचान

“मैं मानती हूँ की स्वच्छ शरीर से ही सम्पूर्ण स्वास्थ्य की शुरुआत होती है और स्वच्छता अपनाकर कई तरह के संक्रमण और बीमारियों से बचाव हो सकता है” मालो देवी ने बताया. उन्होंने अपने गाँव में समुदाय के बीच में स्वच्छता प्रहरी के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है. कोरोना संक्रमण के इस कठिन समय में भी उन्होंने समुदाय से लगातार संपर्क रखते हुए लोगों को साफ़ सफाई अपनाकर कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक और प्रेरित किया है. प्रजनन स्वास्थ्य एवं माहवारी के समय साफ़ सफाई के महत्त्व के बारे में वे लगातार गाँव की महिलाओं को जागरूक कर बताती हैं कि स्वच्छता ही किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव हेतु सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

माहवारी स्वच्छता पर फैली भ्रांतियों का समुदाय से संवाद स्थापित कर किया दूर

महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर उन्होंने केवल महिलाओं से ही नहीं अपितु उनके परिवारजनों से भी संवाद स्थापित करने में सफलता हासिल की है. मालो देवी ने बताया समुदाय में मासिक धर्म को लेकर भ्रांतियां व्याप्त हैं और इनका निवारण समुदाय से निरंतर संपर्क रखकर एवं महिलाओं एवं उनके परिवारजनों को जागरूक कर ही किया जा सकता है. माहवारी के समय स्नान करना, नियमित अंतराल पर पैड को बदलना और फिर इस्तेमाल किये गए पैड का सही रूप से प्रबंधन करने जैसी महत्त्वपूर्ण बातों पर वह निरंतर महिलाओं को जागरूक करती हैं. मालो बताती हैं किशोरी मासिक धर्म के समय अपने सारे नियमित कार्य जैसे स्कूल जाना, घर के काम में मदद आदि कर सकती है और माहवारी का समय किसी भी तरह से किशोरियों के लिए अवरोधक नहीं होता है।

पैड नहीं रहने पर साफ़ सूती कपड़े के इस्तेमाल का देती हैं सन्देश

सभी जगह अभी लॉकडाउन के कारण कई जरुरी चीजों की आपूर्ति ससमय नहीं हो पा रही है. ऐसे समय में सेनेटरी पैड की आपूर्ति भी कई जगहों पर लगातार नहीं हो पा रही है. मालो देवी ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकारा है और अपने गाँव में महिलाओं को पैड नहीं रहने पर साफ़ सूती कपड़े का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहीं हैं. नियमित अंतराल पर पैड अथवा कपड़े से बने पेड का बदलना महिलाओं और किशोरियों को संक्रमण से बचाता है और उन्हें स्वस्थ रखने में अहम् भूमिका निभाता है।

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