बिहार

मरीजों के चेहरे पर मुस्कान से सही मायने में मिलता है आत्मसंतोष

smile on the face of patients truly gives satisfaction

पटना। मानवता के प्रति आजीवन सेवाभाव से समर्पित रहे पेषे से चिकित्सक व पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डा0 विधानचंद्र राय के जन्मतिथि और पुण्यतिथि एक ही दिन 1 जुलाई को होने के नाते उनके सम्मान में देश भर के डाक्टर इस दिन को नेशनल डाक्टर्स डे के रूप में मनाते हैं। इस संबंध में डॉ0 निशिकांत, निदेशक, ऑर्थोपेडिक्स, मेडिवर्सल चेन ऑफ़ हॉस्पिटल, ने कहा कि मरीजों के चेहरे पर मुस्कान देखकर आत्मसंतोष मिलता है। डॉक्टरों को पृथ्वी पर भगवान का दर्जा दिया गया है। मुझे पिछले 21 सालों से सफेद कोट पहनने का अधिकार और कर्तव्य का हर क्षण अहसास रहता है। प्रेरणा और सकारात्मक

दृष्टिकोण दो सबसे महत्वपूर्ण दवाएं हैं जिन्हें कोई भी डॉक्टर अपने मरीजों के लिए निष्ठापूर्वक दे सकता है। दवाएं मरीजों को ठीक कर सकती हैं, लेकिन एक अच्छे डॉक्टर के प्रेरणादायक शब्द भीतर से लड़ने की ताकत दे सकते हैं। ऑर्थोपेडिक और ज्वायंट रिप्लेसमेन्ट सर्जन के रूप में अब तक के कार्य में मुझे 5000 से अधिक ज्वायंट रिप्लेसमेन्ट के मरीजों को दर्द रहित और मुस्कुराते हुए उन्हें अपने घर जाने के समय जो उपलब्धि और गौरव का भाव महसूस होता है, इसे षब्दों में बयां कर पाना मुष्किल है।

डॉ0 निम्मी रानी, निदेशक, दृष्टिकुंज नेत्रालय ,ने इस मौके पर बताया कि एक डॉक्टर होने के नाते हमारी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मैं धन्य हूं कि अपने लोगों की पीड़ा और कष्टों को कम करने के लिए मुझे डाक्टर के रूप में चुने जाने और अपने प्रदेष की जनता का सेवा करने का अवसर और सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मरीजों के दुख दर्द को कम करने का यह कार्य हमें गौरवान्वित करता है। .डाक्टर्स डे पर हम डॉक्टरों के साथ निर्भय होकर अपनी भूमिका निभाने का वादा करते हुए इस दिन को सेलेब्रेट करते हैं। एक नेत्र रोग विशेषज्ञ होने के नाते 5000 से अधिक मोतियाबिंद और रिफ्रेरेक्टिव सर्जरी कर चुकी डाॅ निम्मी रानी बताती हैं कि लोगों को इस दुनिया को अपनी आंखों से देखने में और अधिक भावुकता और करुणा से काम करने में पूरी ईमानदारी से जुटी हैं।

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