लखनऊ

सावन का ‘श्रीगणेश’, पहला सोमवार कल

लखनऊ.  श्रावण…सावन या फिर यह कहा जाये कि भगवान शिव के पूजन-अर्चन का माह, इसका श्रीगणेश होने जा रहा है। इस साल के सावन माह की शुरूआत छह जुलाई से होगी और तीन अगस्त को आखिरी दिन होगा। पहला सोमवार छह जुलाई को, दूसरा 13 को, तीसरा 20 को, चौथा 27 को और पांचवां यानी अंतिम सोमवार तीन अगस्त को पड़ेगा। इस दिन सावन माह की पूर्णिमा है और भाई-बहन के  प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन भी इसी दिवस को पड़ रहा है। वैसे देखा जाये तो इस बार सावन मास में कोरोना महामारी के चलते शिव मंदिर, स्थलों और शिवालयों में शिवभक्तों की भीड़-भाड़ उतनी नहीं दिखेगी। हालांकि राजधानी के शिव मंदिरों की बात करें तो विषम परिस्थितियों के बाद भी इन स्थलों के पुजारी व आयोजक सावन माह के उमंग, उत्सव और महत्व को कमतर नहीं होने देने में लगे हैं। वहीं भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार सावन मास में तमाम धार्मिक संस्थायें और आचार्य आॅनलाइन के जरिये शिव पूजा व अभिषेक कराने की योजना बनाकर रखे हैं। शहर के डालीगंज स्थित ख्यातिलब्ध मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्यागिरी ने बताया कि इस बार कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर शिवालय दर्शन और जलाभिषेक की खास व्यवस्था की गई है। ऐसे में सात फीट की दूरी से एक पाइप के जरिये जल, दुग्ध आदि की धारा शिवलिंग को स्पर्श कर पायेगी। बताया कि रोजाना तड़के चार बजे से लेकर सुबह 10 बजे मंदिर के कपाट खोले जायेंगे और क्रमवार एक-एक करके दूर से शिवलिंग का दर्शन कराया जायेगा।
वहीं इंदिरानगर आम्रपाली मार्केट स्थित पंचमुखी हनुमान महादेव मंदिर के प्रमुख पुजारी प्रदीप दास मिश्र ने बताया कि इस बार का सावन परमकल्याणकारी माह साबित होगा। उनके मतानुसार जिस प्रकार प्राचीन काल में भगवान शिव ने अपने गले में विष धारण कर संपूर्ण जगत को बचाया, उसी प्रकार इस कोरोना जैसी महाआपदा में भी वही पूरे विश्व समुदाय को उबारने का शुभ कार्य करेंगे। रविवार दोपहर बाद से ही शहर के छोटे-बडेÞ बाजार और चौक-चौराहों के आसपास बेल पत्र, फूल-माला आदि बिकने शुरू हो गये।

गुरू का किया नमन-वंदन
रविवार को गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरू-शिष्य की चली आ रही सनातन परंपरा का प्रतिबिंब आज के आधुनिक युग में भी दिखा। हालांकि गुरू-शिष्य के बीच स्थापित अटूट सम्मान, प्रेम व अनुसरण को दर्शाने का तौर-तरीका थोड़ा अलग दिखा। कोरोना के चलते लोगों ने अलग-अलग ढंग से अपने-अपने गुरूजनों को नमन व वंदन किया। इसके लिये आॅनलाइन प्रक्रिया का भी सहारा लिया गया। कॉलेज, विद्यालय, शिक्षण संस्थाओं से लेकर धार्मिक स्थलों व संगठनों से जुडेÞ हर वर्ग के लोगों ने अपने गुरूजनों को ऐसे पावन दिवस पर याद किया और उनका आशीर्वाद लिया। वैसे रविवार को कुछ निर्धारित समय के लिये चंद्रग्रहण भी रहा, ऐसे में लोगों ने दान आदि देकर पुण्य प्राप्त करने की मंगल कामना की।

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