सुल्तानपुर

आखिरकार पालिका की पंचायत पहुंच गई थाने, वरिष्ठ लिपिक पर हुआ मुकदमा दर्ज

 

 

 

 

 

 

 

सुल्तानपुर— वर्षो से सभासदो व अध्यक्ष नगर पालिका के बीच चल रही विवाद की पंचायत आखिर कार कोतवाली नगर पहुंच गई , सत्ता की हनक शासन में चली, प्रशाशन में चली , लेकिन कोतवाली नगर में तहरीर लिख गई ।
विदित हो कि पिछले दिनों बजट प्रस्ताव को लेकर बोर्ड की बैठक बुलाई गई , सभासदो के आक्रोश व शिकायत के बाद जिलाधिकारी सी इंदुमति ने प्रसाशनिक अधिकारी उपजिलाधिकारी सदर राम जी लाल को बोर्ड की बैठक नामित अधिकारी नियुक्ति किया , बोर्ड की बैठक प्रारम्भ हुई , लगभग 49 करोड़ रुपये के बजट का एजेंडा सभासदो के सामने रक्खा गया , लेकिन जब सभासदो ने क्रमवार बजट को खर्च करने का शिड्यूल तत्कालीनअधिशाषी अधिकारी रविन्द्र कुमार से पूछना शुरू किए , तो अध्यक्ष महोदया का पारा सातवे आसमान पर चढ़ गया , अध्यक्ष महोदया का पारा सातवे आसमान पर इस कदर चढ़ा कि सदर विधायक सूर्य भान सिंह को भी अध्यक्ष महोदया की खरी खोटी बातों को सुनना पड़ा , और अध्यक्ष महोदया बोर्ड की बैठक को छोड़कर चल दी , सभासदो ने प्रोसिडिंग बुक पर शिकायत करने को लेकर पालिका के ऑफिस में धरने पर बैठ गए , खबर डी एम इंदुमति को लगी , तो आनन फानन में वित्त एव राजस्व अधिकारी को भेज दी , अधिकारियों के समझाने के बाद सभासदो ने धरने को समाप्त कर दिया , लेकिन कुछ ही दिनों में सभासदो को पता चला कि अध्यक्ष नगर पालिका व उनके पति अजय जयसवाल द्वारा प्रोसिडिंग बुक में छेड़ छाड़ की गई है , सभासदो ने जब प्रोसिडिंग बुक की पड़ताल की तो उसमें कई जगह कटिंग दिखाई पड़ी , जिसको लेकर सभासदो ने पालिका प्रशाशन के खिलाफ कार्यवाही कराने को लेकर अड़ गए , आलम यह रहा कि पालिका के एक बाबू पर गाज गिर गई ।
: जिसमे पालिका के वरिष्ठ लिपिक सुभाष मिश्रा पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया है
भाजपा नेता सभासद डॉक्टर संतोष सिंह के प्रार्थना पत्र पर प्रकरण की जांच के बादनगर कोतवाली में धारा 166 ,167 466 , 467 , 471 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज हुआ ।

पालिका अध्यक्ष पर लगे है वित्तीय अनियमितता का आरोप—

पालिका अध्यक्ष बबिता जयसवाल पर करोड़ो रूपये के वित्तीय अनियमितता का आरोप भी लग चुका है , सभासदो की शिकायत पर तत्कालीन डी एम लिंगम ने सभासदो की शिकायत पर लगभग 13 विन्दुओ पर जांच कराई थी ,जिसमे सफाई , विद्दुत , टैक्सी स्टैंड , जैसे तमाम विन्दुओ पर जांच के बाद करोड़ो रूपये वित्तीय अनिमितता की पुष्टि हुई थी , जिसकी रिपोर्ट तत्कालीन डी एम लिंगम ने शासन को भेज दिया , लेकिन सामने रिजल्ट ढाक के तीन पात निकले , अफसोस कि बात यह है कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस भ्र्ष्टाचार मुक्त का दावा करते है , उनके ही राज में उनके ही पार्टी के नेता भ्र्ष्टाचार का बढ़ावा दे रहे है , यह बात इस लिए कहा जा सकता है कि करोड़ो रूपये के घोटाले के बाद भी शासन ने पालिका प्रशाशन के ऊपर कोई कार्यवाही नही कि , जिसका आलम यह रहा कि लगभग तीन साल के कार्यकाल में अध्यक्ष नगर पालिका पर लगातार सभासदो द्वारा विरोध चल रहा है ।

संघ से है पुराना रिश्ता—

कहा जाता है कि अध्यक्ष नगर पालिका के पति अजय जयसवाल के पिता का संघ से पुराना नाता था , श्री जयसवाल के स्वर्गीय पिता संघ के एक कर्मठ ,ईमानदार , स्वच्छ विचार के नेता कहे जाते थे , पिता के पृष्ठिभूमि को भुना कर अजय जयसवाल ने अपनी पत्नी बबिता जयसवाल को भाजपा से टिकट दिलवा दिए , श्री राम का नारा गूंज और पालिका अध्यक्ष के पति श्री जयसवाल का अरमान पूरा हो गया , पत्नी पालिका की अध्यक्ष बनी , तो पति का दिन दूनी रात चौगनी हो गई , ईमानदारी का शोशल मीडिया पर ढोंग अलापते रहे , और इधर पालिका में सेंध मारते रहे , हिन्दू मुस्लिम को लड़ाते रहे , और पार्टी व संघ में हिंदुत्ववादी नेता होने का परचम लहराते है , यहीकारण है कि डबल मुखोटे में रह रहे श्री जयसवाल की वजह से पालिका अध्यक्ष पर शासन से लेकर प्रशाशन तक कोई कार्यवाही करने से कतरा रहा है।

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