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खिंची आपराधिक ‘विकास’ की नई लकीर!

रवि गुप्ता

-कानपुर के इलाकायी जर-जवार से लेकर जरायम की दुनिया तक

-एक हफ्ते के भीतर 50 हजार से पांच लाख तक का इनामिया अपराधी घोषित हुआ
-दुर्दांत अपराधी का सामान्य ढंग से पकडे जाना, खडे करता कई अनसुलझे सवाल

लखनऊ.  जरायम की दुनिया के नजरिये से देखें तो जिस विकास दुबे के नाम का जिक्र कानपुर और उसके आसपास के क्षेत्र में और जर-जवार के आगे सार्वजनिक तौर पर कहीं खास चर्चित नहीं था…महज एक हफ्ते के अंदर उसने आपराधिक ‘विकास’की ऐसी लम्बी लकीर खिंची कि जिसके आगे मौजूदा समय के बडे-बडे दिग्गज, दबंग और यहां तक कि मोस्टवांटेड हिस्ट्रीशीटरों और गैंगेस्टरों का कद  बौना ही प्रतीत हो रहा। कानपुर देहात के एक छोटे से इलाके का मनबढ़ किस्म का अपराधी महज एक हफ्ते के भीतर 50 हजार से लेकर पांच लाख का इनामिया हिस्ट्रीशीटर बन जाता है, फिलहाल उसके कृत्यों को अभी परत-दर-परत कुरदने की कोई खास जरूरत नहीं लग रही। वहीं पुलिस विभाग के कुछ जमीनी जानकारों के मुताबिक बीते तीन-चार दशकों में तो संभवत: इस किस्म के किसी अपराधी का नाम नहीं लिया जा सकता जिसने पूरे टॉरगेट के साथ इतने खाकी धारियों को पहले मौत की नींद सुलायी हो, और फिर संपूर्ण सिस्टम पर भारी पड़ते हुए बडे ही सहजता के साथ अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया हो।
लेकिन इससे इतर सूबे के एक इलाके से उगे अपराध के इस बेलगाम अपराधी के अजीबो-गरीब कृत्यों पर गौर करें…मसलन, महाकाल के द्वार पर सुरक्षा गार्ड से यह कहना कि मैं ही हूं विकास दुबे, कानपुर वाला। ऐसे दुर्दांत किस्म के अपराधी का इस प्रकार बडेÞ ही सामान्य ढंग से पुलिस के हाथों में आ जाना, कई अनसुलझे सवाल खडेÞ करता है। आपराधिक जगत पर नजर रखने वाले जानकारों की मानें तो इस एक हफ्ते के पूरे आपराधिक नाटकीय घटनाक्रम का रचयिता शायद वो खुद ही लग रहा…यानी कर्ता भी मैं और धर्ता भी मैं।
बहरहाल, इतना तो कहा ही जा सकता है कि अपराधी और पुलिस की लुकाछिपी के खेल में जिस अंदाज में विकास खाकी के हत्थे चढ़ा…पहली नजर में तो वो गिरफ्तारी जैसा लग रहा तो दूसरी दृष्टि से सरेंडर की बू आ रही। सवाल यह भी उठ रहा कि…जिस दबंगई से विकास ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर कानपुर में सरेरात पहले खाकी के साथ मौत का तांडव खेला, फिर अपने हाते में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज डीबीआर को लिया और फिर कैसे चकमा देकर हजारों किमी दूर एमपी के उज्जैन पहुंच गया, इसे क्या कहा जाये। जबकि पहले ही दिन से यूपी एसटीएफ की टीम उसके पल-पल के लोकेशन को लेकर काफी संजीदा रही। शुरूआत में यह भी कहा गया कि विकास दुबे यूपी बॉर्डर पार करते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान व मध्य प्रदेश के अलावा नेपाल भी जा सकता है…यानी इन कयासों के बीच उक्त सभी अन्तर्र्राज्यीय सड़क सीमाओं पर पुलिस अलर्ट हो गयी, बावजूद इसके विकास अपने साथियों के साथ कैसे स्टेट से लेकर नेशनल हाईवे को पार कर गया। जबकि हकीकत यह है कि कानपुर से लेकर उज्जैन की हजारों किमी की दूरी के बीच इन राजमार्गों के टोल प्लाजा पर अनगिनत सीसीटीवी लगे हैं जिनकी नजरों से बच पाना मुश्किल ही माना जाता है।

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