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कोरोना के साथ—साथ कावासाकी बीमारी का भी बच्चों में ज्यादा खतरा, जानें दोनों बीमारियों के बीच क्या है रिश्ता…

भारत में कोरोना के साथ एक ऐसा मामले सामने आया जिसमें 14 साल की बच्ची कोरोना वायरस के साथ ही कावासाकी सिंड्रोम बीमा​री का भी शिकार हो गई। ये दोनों ही बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।

डॉक्टर्स इस वक्त ये नहीं जानते कि कावासाकी बीमारी, जिसे बच्चों में मल्टीसिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम यानी MIS-C भी कहा जाता है, का कारण क्या है। जिन बच्चों में ये बीमारी पाई गई, या तो उनमें SARS-CoV-2 वायरस पाया गया या फिर तो वह कोविड-19 के मरीज़ के आसपास रह चुके थे।

कावासाकी बीमारी [Kawasaki disease]

कावासाकी बीमारी शरीर की रक्तवाहिनियों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें रक्तवाहिनी की दीवारों में सूजन होती है और यह सूजन हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को कमजोर कर देती है। गंभीर स्थिति में हार्ट फेल्योर या हर्ट अटैक होने की भी संभावना होती है।

बुखार के साथ त्वचा पर चकत्ते दिखना, चीभ का लाल होना, लाल होंठ, हाथों और गले में सूजन और आंखों का लाल होना इसके लक्षणों में शामिल है। ऐसा माना जाता है कि ये बीमारी शरीर को हुए पहले किसी वायरल संक्रमण के रिएक्शन से होती है। ये बीमारी सबसे पहले जापान में सामने आई थी। भारत में भी इस बीमारी के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसा मामला सबसे पहले इटली में सामने आया था,

उसके बाद फ्रांस, इंग्लैंड और अमेरिका में भी कई मामले देखे गए। कोरोना वायरस महामारी के दौरान कई बच्चों में कावासाकी सिंड्रोम के तरह के लक्षण देखने को मिले, जिससे बच्चों की बीमारी ने काफी गंभीर रूप ले लिया। इनमें से ज़्यादातर बच्चे कोविड-19 के मरीज़ से रिश्ता रह चुका था। इनमें से ज़्यादातर बच्चों के गले या फिर एंटीबॉडीज़ में कोरोना वायरस पाया गया।

इसलिए कावासाकी सिंड्रोम का कोविड-19 से रिश्ता माना जा रहा है। क्योंकि कोरोना संक्रमण होने के 2-3 हफ्तों बाद कावासाकी के लक्षण देखने को मिलते हैं, इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि कोविड-19 होने पर शरीर के इम्यून की प्रतिक्रिया का नतीजा कावासाकी बीमारी होती है।
कावासाकी या फिर कोरोना वायरस से हुई कावासाकी के मरीज़ों का इलाज समय पर और अच्छे से किया जाए, तो वे काफी जल्दी बीमारी से उबर जाते हैं। हालांकि, उन्हें लंबे समय तक चेक-अप, दवाएं और ECHO कई महीनों या फिर सालों तक कराना होता है।

कावासाकी बीमारी में मल्टीऑर्गन फेलियर से मौत भी हो सकती है। अगर हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में सूजन आ जाए और समय पर इलाज न शुरू किया जाए, तो इन धमनियों में क्लॉटिंग हो सकती है।

जिसकी वजह से युवाओं को भी हार्ट अटैक आ सकता है। ये जानलेवा साबित हो सकता है, यहां तक कि सर्जरी की भी ज़रूरत पड़ सकती है।कोरोना वायरस के साथ कावासाकी बीमारी के लिए कई तरह के दिशानिर्देश हैं। इन दिशानिर्देशों में ऐसे मामले,

उनकी जांच, इलाज और फिर फॉलोअप शामिल हैं। साथ ही मां-बाप और डॉक्टर को इस स्थिति के बारे में पूरी तरह से पता होना चाहिए, ताकि सही समय पर सही इलाज हो सके।

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