Tuesday, December 1, 2020 at 4:57 AM

आई फ्लू या कंजेक्टिवाइटिस के मरीजों को संक्रमण से बचने की सलाह

पटना। हर साल मानसून के दौरान आंख आने की बीमारी आई फ्लू यानि कंजेक्टिवाइटिस का प्रकोप शुरू होता है। इस साल भी चिकित्सकों के पास हर रोज दर्जनों मरीज इस परेशानी को लेकर पहुंच रहे हैं या फोन कर रहे हैं। कोरोना काल में चिकित्सक ऐसे संक्रमण से बचाव के लिए ज्यादा एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। आंख के ग्लोब के ऊपर (बीच के कॉर्निया क्षेत्र को छोड़कर) एक पतली झिल्ली होती है जिसे कंजेक्टिवा कहते है। कंजेक्टिवा में किसी भी तरह के संक्रमण (बैक्टीरियल, वायरल, फंगल या एलर्जी) होने पर सूजन हो जाती है जिसे कंजेक्टिवाइटिस कहा जाता है। यह रोग तीन प्रकार का होता है, एलर्जिक, बैक्टीरियल व वायरल। मौसम में होने वाले बदलाव के समय वायरल कंजेक्टिवाइटिस होता है।

इसमें गर्मी से सर्दी या सर्दी से गर्मी के समय वातावरण में निष्क्रिय वायरल सक्रिय हो जाते हैं। वायरल कंजेक्टिवाइटिस खतरनाक नहीं माना जाता है। यह स्वतः ही 4 से 6 दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन एलर्जिक व बैक्टीरियल कंजेक्टिवाइटिस ज्यादा खतरनाक होता है। धूल, गंदगी व तेज गर्मी के कारण एलर्जी व बैक्टेरिया से यह रोग होता है। अगर उचित समय पर इलाज न किया जाए तो यह आंखों को पूरी तरह से खराब कर देता है। इससे आंखों में घाव होने की आषंका बढ़ जाती है। दृश्टिकुंज नेत्रालय की निदेषक डाॅ निम्मी रानी ने कंजेक्टिवाइटिस के लक्षणों के संबंध में बताया कि – आंखों में तेज जलन, आंखें लाल होना, आंखों में सूजन, पानी आना या खुजलाहट होना व आंखों में दर्द महसूस करना षामिल है।

बचाव के लिए उन्होंने हाथों को साफ रखने , आंखों को नियमित धोने, रुमाल , गमछा या तौलिया आदि साफ रखने, मरीज के कपड़े इस्तेमाल नहीं करने और घर से बाहर निकलते समय चश्मा लगाने की सलाह दी। नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ0 निम्मी रानी का कहना है कि उनके पास हर रोज 20 से 25 फोन इसी समस्या के लिए आ रहे हैं। यह संक्रमण का समय है, हर साल इसी समय आई फ्लू या कंजेक्टिवाइटिस के मरीजों में इजाफा होता है।

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