बिहार

बिहार में रैपिड एन्टीजेन टेस्ट किट से कोरोना मरीजों की जांच शुरू

Examination of corona patients started with rapid antigen test kit in Bihar

पटना। भोजपुरी में एक कहावत है ‘आंख के आंधर, नाम नयन सुख’ और यह कहावत आज प्रतिपक्ष के नेता पर सटीक बैठता है। सच उन्हें दिखाई नहीं देता और झूठ का बवंडर बांधते हैं। यह कहना है सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को उनके माता-पिता का 1990 से 2005 का शासनकाल याद दिलाते हुए कहा कि 15 साल में शिक्षा और स्वास्थ्य का मटियामेट और जगह-जगह चरवाहा विद्यालय खोल सरकारी राशि का बंदरबांट करने वाले शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर लोगों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष नासमझ और लावरवाह हैं। सूबे की जनता के साथ गैर जिम्मेवाराना व्यवहार करते हैं। संकट की घड़ी में घर से भाग जाना या फिर घर में बंद होना इनकी फितरत बनी हुई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बयान देने वालों को आज तक मुजफ््फरपुर जाने का समय क्यों नहीं मिला। मुजफ््फपुर में इस वर्ष एइएस हास्पीटल में भर्ती चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को देखने आज तक क्यों नहीं गये। चकमी बुखार से पीड़ित बच्चों से मिलने का उनके पास एक मीनट का भी समय नहीं है, लेकिन पटना में कमरे में बंद होकर बेफजूल की बयानबाजी से बाज नहीं आते हैं। राजद शासनकाल में स्वास्थ्य सेवा का यह हाल था कि मेडिकल काॅलेज अस्पताल में रोगियों की संख्या शतक भी नहीं लगा पाती थी। ब्लाॅक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तो रोगियों की संख्या प्रतिदिन 2 भी पार नहीं कर पाती थी, जो आज प्रतिदिन 3 सौ से अधिक हो गयी है। एनडीए की सरकार में ब्लाॅक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में आउटडोर और इमरजेंसी सेवा में रोगियों की भरमार रहती है।

मेडिकल काॅलेज एवं अस्पतालों में भी रोगियों का आना बदस्तूर जारी है। यही नहीं उनका सही ढंग से इलाज हो रहा है और वे स्वस्थ एवं संतुष्ट होकर जा रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था की हालत यह है कि राजद शासनकाल में शिक्षकों को सालों-साल वेतन नहीं मिलता था। स्कूल में छात्रों की संख्या नगण्य थी, लेकिन एनडीए सरकार ने योजनबद्ध तरीके से प्राथमिक और उच्च शिक्षा को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया। छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ायी और लाखों शिक्षकों को बहाल किया। आज शिक्षकों को नियमित वेतन भी दिया जा रहा है और छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन के साथ-साथ योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।

कोरोना की चर्चा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बिहार में रैपिड एन्टीजेन टेस्ट किट से संक्रमितों की जांच विभिन्न जिलों में शुरू हो गयी है। विभिन्न जिलों में 40 हजार से ज्यादा किट पहुंच गये हंै। इस किट से महज आधा घंटा में संक्रमण की जांच हो जाती है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रतिदिन 9 हजार से अधिक लोगों की जांच की जांच की जा रही है और यह कार्य जिले के अस्पतालों में भी निरंतर जारी है। उन्होंने बताया कि बिहार मंे कोरोना से स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 73 फीसदी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में कोरोना संक्रमितों के इलाज की दिशा में सरकार पूरी तरह सचेत है।

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