पटनाबिहार

चीन के हांगकांग-झुहाई एंड मकाई ब्रिज से कहीं अधिक चर्चा में हैं बिहार का ब्रिज सत्तरघाट महासेतु

 वर्ष 2012 से लेकर लगातार गिरते रहें है पुल , खड़ा होते रहा है सवाल लेकिन कार्रवाई शून्य

>> क्वालिटी का सर्टिफिकेट देने वाला टीम ,क्या ऑफिस में बैठकर बनाती है रिपोर्ट

>> पुल है पुरी तरह से सुरक्षित ,पुल के पीछे वाला भाग के समीप मिट्टी बहा है – मंत्री

>> जेई से लेकर चीफ इंजीनियर तक कमीशन का होता है बंदरबांट, ट्रांसफर -पोस्टिंग है बड़ा कारण – अधिवक्ता

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । दो वर्ष पूर्व सबसे लंबा ब्रिज (पुल ) हंगकांग-झुहाई एंड मकाऊ ब्रिज बना था।  पुरे दुनिया में सबसे लंबा ब्रिज बनाने को लेकर चीन के विकसित इंजीनियरिंग की चर्चा हुईं थी ।भारत देश के बिहार के सुशासन में इंजीनियरिंग का एक अलग खिताब हासिल किया हैं । 264 करोड़ की लागत से बना गोपालगंज जिले के सत्तरघाट महासेतु ब्रिज उद्घाटन के मात्र 29 दिन में ध्वस्त हो गया । बिहार के इंजीनियरिंग से निर्माण होने वाले ब्रिज की चर्चाएं सोशल मीडिया पर जमकर हो रही हैं । राजनीतिक पार्टियां इस कारनामें की जांच की मांग कर रहें हैं । अब सवाल उठता है की जेई ,एसडीओ से लेकर चीफ इंजीनियर और ऊपर तक कमीशन का बंदरबांट करेंगे तो फिर क्वालिटी की बात हम कैसे कर सकते हैं । क्वालिटी सर्टिफिकेट देने वाली इंजीनियर टीम साइड पर थोड़े जाती है, सर्टिफिकेट को ऑफिस में बैठकर बनायी जाती हैं । ट्रांसफर -पोस्टिंग जब रूपये के बदौलत होगी तो क्वालिटी की आशा आप कैसे कर सकते हैं । इसको लेकर अक्सर सवाल खड़ा होते रहें हैं लेकिन सभी सरकार का कुछ ऐसा ही हाल रहता हैं । पूर्व मंत्री तेजस्वी यादव ने ब्रिज ध्वस्त होने पर सरकार से सवाल खड़ा किया है की कमाल की इंजीनियरिंग हैं ।  पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहां की कोई ब्रिज नहीं टूटा हैं ।ब्रिज से जुड़ने वाली सड़क का अगला हिस्सा और पुल का पीछे वाला हिस्सा ध्वस्त हुआ हैं । इंजीनियर टीम रवाना हो गयी हैं रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएंगी । घटिया सड़क निर्माण ,घटिया ब्रिज निर्माण निर्माण को लेकर सैकड़ों शिकायतें मिलती हैं । सरकार के पास कोई आकड़ा है की कितने इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई हुईं । शायद अनुपात शून्य ।

लगातार ब्रिज होते रहें है ध्वस्त

 ब्रिज निर्माण में घटिया क्वालिटी होने का अक्सर मामला सामने आते रहा हैं । ग्रामीण सड़क में घटिया क्वालिटी की बात ही अलग है, योजना का मात्र 40 प्रतिशत काम होता ,बाकी सब बंदरबाद। सुत्रों की मानें तो बिहार में बनने वाले ब्रिज की योजना में बजट करीब 30 % बढ़ाकर बनाया जाता हैं और इसमें कमीशन देकर करीब 30 % बचत ठेकेदार के खाते में आता हैं । दिल्ली सरकार ने इसका उदाहरण और प्रमाण भी गिनाया हैं ।
 बिहार का हाल भी कुछ इसी तरह है। ब्रिज निर्माण में भारी लूट है और वर्ष 2012 से लगातार ब्रिज गिरने ,ध्वस्त होने की घटनाएं होते रही हैं ।  19 करोड़ की लागत से बनी सोमनाहा-विरौली ब्रिज ,वर्ष 2014 बेनीबाद ब्रिज ,वर्ष 2015 -सोमनाहा-विरौली ब्रिज ,वर्ष-2017 सासाराम रेलवे ब्रिज , महात्मा गांधी सेतु के मरम्मती में बड़ी लूट विवाद ,वर्ष 2020 में पटना बेली रोड ब्रिज निर्माण आदी ।

कमीशन जारी रहेगा जबतक ट्रांसफर -पोस्टिंग में खेल

पटना हाईकोर्ट के जनहित याचिका विशेषज्ञ ,अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर ने कहां की राज्य में किसी की सरकार हो सड़क निर्माण ,ब्रिज निर्माण में कमीशन का बड़ा बंदरबांट हैं । सड़क निर्माण में जेई ,एसडीओ, कार्यपालक अभियंता ,चीफ इंजीनियर तक को हिस्सा तय हैं । इससे कोई अपरिचित नहीं हैं ।मलाईदार जगह पर पोस्टिंग के लिए अच्छी -खासी देकर आते हैं फिर आप कैसे यह कहं सकते है की वह गुणवत्ता से समझौता करेगा । ऐसा नहीं है की शिक्षित समाज भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतें नहीं करती लेकिन संबंधित विभाग के वरीय अधिकारी और मंत्री मंडल में बैठे लोगों की नियत साफ नहीं होती । जिस तरह से ट्रांसफर -पोस्टिंग में गुणवत्ता गायब हैं उसी तरह से सभी प्रकार के निर्माण कार्य में गुणवत्ता गायब हैं । भ्रष्टाचारियो पर कार्रवाई के जगह उसको बचाने के लिए सिस्टम काम करती हैं जो लोकतंत्र के लिए हत्या समान हैं ।
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