लखनऊ

अवध बस स्टेशन के लिये ‘ब्रेकर’ बना पॉलीटेक्निक चौराहा

रवि गुप्ता

-चौराहे पर स्टॉपेज खत्म होने के बाद ही दौड़ सकेगा नये बस अड्डे का दैनिक संचालन
-जहां बसें रुकेंगी वहीं यात्री भी मिलेंगे, नयी जगह आने-जाने से यात्री रखेंगे दूरी

लखनऊ.  इस कोरोना काल के दौर में जहां एक तरफ पूरे देश में रेलवे का दैनिक संचलन पूरी तरह रुका हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर सूृबे के मुखिया ने गुरूवार को राजधानी लखनऊ के फैजाबाद हाईवे सम्पर्क मार्ग पर एक और नये बस स्टेशन की सौगात रोडवेज मुसाफिरों को दी। कमता चौराहे के समीप स्थित अवध बस स्टेशन से रोडवेज बस संचालन को ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है। कहा जा रहा है कि इस नये बस स्टेशन के शुरू होने से खासकर पूर्वांचल क्षेत्रों की बसों का आवागमन शहर के अंदर बंद हो जायेगा और कहीं न कहीं टैÑफिक जाम की समस्या भी कम होगी। मगर ध्यान से देखा जाये तो इस नवनिर्मित बस स्टेशन से चंद दूरी पर स्थित पॉलीटेक्निक चौराहा ही अब अवध बस स्टेशन के दैनिक संचालन में ब्रेकर बनता दिख रहा है। दरअसल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा से जुडेÞ जानकारों की मानें तो जब तक पॉलीटेक्निक चौराहे पर से रोडवेज बसों के स्टॉपेज को खत्म नहीं किया जायेगा तब तक अवध बस स्टेशन के दैनिक संचालन का ग्राफ नहीं बढ़ पायेगा। यही नहीं गौर हो कि लॉकडाउन के कुछ समय पहले ही पॉलीटेक्निक चौराहे पर रोडवेज बसों के आये दिन खड़े होने की समस्या से निपटने के मद्देनजर यहां स्थित वेव मॉल के सामने प्रमुख सड़क पर दोनों तरफ रोडवेज प्रबंधन ने बकायद कई लाख रुपये की लागत से बस स्टॉपेज प्वाइंट भी बनवाये। जिसका बकायदा शुभारम्भ मौजूदा परिवहन मंत्री ने ही किया था। लेकिन अब फैजाबाद रोड पर कमता चौराहे के आसपास स्थित कॉलोनियों में रहने वाले तमाम शहर वासियों का यही कहना है कि मॉल के सामने जब उपरोक्त दोनों प्वाइंटों पर रोडवेज बसें आते-जाते रुकेंगी तो अवध बस स्टेशन को कोई भी रोडवेज यात्री क्यों प्राथमिकता देगा? गौर हो कि कोरोना महामारी के चलते जब क्रमवार लॉकडाउन का दौर बढ़ता चला जाता रहा तो ऐसे में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों का पहिया भी एक प्रकार से थमा ही रहा। हालांकि कुछ समय के अंतराल पर जब बाहरी राज्यों से आये प्रवासी श्रमिकों को सूबे में उनके गंतव्य तक पहुंचाने का बीड़ा योगी सरकार ने उठाया तो यूपी रोडवेज की सीमित बसें सड़कों पर चलती दिखीं। मगर इन
सबके बीच बसों का नियमित संचालन नहीं हो पाने से रोडवेज को हर दिन करोड़ों का आर्थिक झटका लगता रहता। अब जबकि क्रमवार करते हुए रोडवेज बेडेÞ में खड़ी आधी बसें आॅनरोड चलनी शुरू हुर्इं तो…धीरे-धीरे करके निगम का आर्थिक पहिया भी चलने लगा। वहीं राजधानी को देखें तो उद्घाटन से जुड़ी कई संभावित तारीखों के दौर बीत जाने के बाद आखिरकार लॉकडाउन में अब जाकर अवध बस स्टेशन का शुभारम्भ हो पाया। मगर ध्यान देने वाला पहलू यह भी है कि इस नवनिर्मित बस स्टेशन से थोड़ी दूरी पर स्थित पॉलीटेक्निक चौराहे के उस अघोषित, अनियमित व अनियंत्रित बस स्टॉपेज या फिर बस ठहराव प्वाइंटों से कैसे रोडवेज प्रबंधन पार पा सकेगा जहां से बीते दो दशक से शहर भर के ही नहीं बल्कि बाहरी यात्री भी अपने-अपने रूट की रोडवेज बसों को पकड़ते हैं। इतना ही नहीं रोडवेज बसों की स्टैयरिंग थामने वाले ड्राईवर व आर्थिक पहिये की चाभी माने जाने वाले कंडक्टर भी पैसेंजर लोड फैक्टर के दबाव में उसी स्थान को तरजीह देंगे जहां से अधिकाधिक सवारियां निकलेंगी।

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