जौनपुर

सराफा लूट कांड में पुलिस पर बदमाशों का खौफ व मुखबिरी दिख रही भारी

मुंगराबादशाहपुर– पंवारा बाजार में बीते शुक्रवार को दिन दहाड़े दोपहर 11 बजे सराफा कारोबारी अमर नाथ सेठ की दुकान पर सिर्फ कुछ सेकंडों में बदमाशों के गिरोह ने दस लाख से अधिक रुपए का आभूषण व नगदी  लूट लिए और पुलिस को चकमा देकर आसानी से भाग निकले। यह वारदात किसी बीरान जगह का नही बल्कि ठीक बाजार की घनी बस्ती व हाइवे के बगल की है। इससे लगता है कि पुलिस की खौफ व मुखबिरी बदमाशों के आगे बौने पड़ गए। जिससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस की राइफल पर बदमाशों का तमंचा भारी पड़ गया। बताते चले कि बड़े नाटकीय ढंग से बदमाशों का गिरोह घटना को आसानी से अंजाम देने में कामयाब हो गए। इस प्रकार के वारदात में बदमाशों द्बारा दिखाएं गए शेरे दिली  व्यापारियों सहित लोगों का दिल दहल गया है। चश्मदीद लोग, दुकानदार के परिजन व बाजार सहित आसपास के क्षेत्र वासी लूट के उक्त भयावाह मंजर के खौफ व तमंचे से दागी गई गोलियों की आवाज को याद कर आज भी सहमें हुए हैं। घटना की गंभीरता पर विभिन्न पहलुओं पर दृष्टिगत किया जाए तो पुलिस की चूक भी घटना को अंजाम देने में काफी सहयोग किया है। इसके चलते घटना ने पुलिस के ऊपर भी तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े घटना को अंजाम देने के लिए बदमाशों के लिए एक दिन की बात तो नही रही होगी। दुकान को चिन्हित करने, घटना से संबंधित सहयोगियों से संपर्क करने, भागने के रास्ते तय करने व दुकान की लूट संबंधित रणनीति बनाने के लिए पहले से ही बदमाशों का यहां पर आना जाना लगा होगा।तो बाजार में सुरक्षा के लिए चक्रमण करती पुलिस उनके दिए गए दस्तक से अनजान होना ही घटना को अंजाम तक पहुंचा दिया है। जो कहना अनुचित नही होगा। पुलिस की यह चूक उक्त बड़े घटना में सूत्राधार माना जाए तो अतिश्योक्ति नही होगा। तो वहीं दूसरी बात यह है कि जब प्रत्यक्षदर्शियों ने इशारा किया कि तीन बाइकों पर सवार छ बदमाशों का गिरोह घटना को अंजाम देकर मुंगराबादशाहपुर की तरफ भाग रहे हैं तो नाकेबंदी में भी पुलिस को बदमाशों को पकड़ने में कामयाबी हासिल नही हो पाई। तो वहीं बदमाशों द्वारा भागने की बनाई गई रणनीति भी पुलिस की रणनीति पर भारी पड़ गया। जबकि उक्त घटना रात की नही बल्कि दिन दहाड़े दोपहर की है।अब भी बदले परिदृश्य के आधार पर पुलिस विभाग अपनी नाकामी कार्यशैली पर चिंतन के साथ सुरक्षा व मानवीय मूल्यों की हिफाजत के लिए परिवर्तन नही किया तो अमरनाथ सेठ जैसे व्यापारी दिन दहाड़े लुटतें रहेंगे। वहीं पुलिस अंधेरे में लाठी पीट कर अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री करती रहेंगी।जो जनमानस के लिए बड़ा ही दु:खदायी साबित होगा।

loading...
Loading...

Related Articles