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प्रभु राम ने ली बड़ी परीक्षा, तब सौंपी अयोध्या की विधायकी!

रामतीर्थ ‘विकल’

-रामनगरी की कहानी, मौजूदा जनप्रतिनिधि की जुबानी
-100 साल बाद जहां लहराया था भगवा, वहां बन रहा दिव्य राम मंदिर
-वेद प्रकाश गुप्ता बोले, राम नगरी की माटी हृदय को कराती है शीतलता का आभास
अयोध्या, (तरुणमित्र) 2 अगस्त। अयोध्या…100 साल बाद जिस स्थान पर पहली बार भगवा ध्वज लहराने का सौभाग्य मिला था, वहीं आज प्रभु श्री राम का दीप मंदिर बनने जा रहा है। राम नगरी की माटी हृदय को शीतलता का आभास कराती है। राम मंदिर निर्माण ने मेरे जीवन की सारी अभिलाषा को पूरा कर दिया है। यह विचार अयोध्या के मौजूदा भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता का है। उनका जन्म बुलंदशहर के खुर्जा में जरूर हुआ परंतु राम नगरी अयोध्या उनके जीवन की कर्मभूमि सदैव बनी रही। भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के जीवन के फ्लैशबैक को देखें तो पता चलता है कि उनका जन्म डॉक्टर कांतिलाल गुप्ता के पुत्र के रूप में हुआ। डॉ गुप्ता प्रभु राम के अनन्य भक्त थे और उन्हें तुलसीकृत रामचरितमानस कंठस्थ था और वह परिवार को बैठाकर बड़े मनोयोग से रामकथा का रसास्वादन कराते थे। बालपन में ही बच्चों में प्रभु श्री राम का मयार्दा पुरुषोत्तम स्वरूप समाहित हो गया। वेद प्रकाश गुप्ता चार भाइयों में सबसे बड़े थे और उनका जन्म खोजा में ही 19 फरवरी 1948 में हुआ। बालपन में मिले राम के संस्कार उनके हृदय में समाहित हो गए और उनमें प्रभु राम की नगरी अयोध्या की माटी को छूने की ललक जाग उठी। श्री गुप्ता ने एनआरईसी कॉलेज खुर्जा से सन 1967 में बीएससी की डिग्री हासिल हुआ। कालांतर में ऐसी परिस्थितियां बनी की वह पूरे परिवार सहित 1974 में  आकर बस गए जहां से अयोध्या धर्मनगरी मात्र सात किलोमीटर दूर थी। वह बताते हैं कि यह बात उन दिनों की है जब भगवान राम लला ताले में बंद थे और उन्हें मुक्त कराने के लिए राम भक्त संघर्षरत थे। प्रभु राम लला की मुक्त के लिए हर साल प्राकट्य उत्सव मनाया जाता था। उत्सव के लिए गठित राम जन्मभूमि सेवा समिति से उनका नाता सन 1984 से जुड़ा रहा। उन्हें राम काज का मार्ग मिल गया। वह पूरे मनोयोग से राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गएद्य। उस समय समिति के अध्यक्ष रामचरित्र दास, महामंत्री दिनेश माहेश्वरी, मंत्री वेद प्रकाश गुप्ता, सदस्य अनिल चंद्रा आदि शामिल थे। 1984 में वेद प्रकाश गुप्ता अपने साथियों के साथ प्राकट्य उत्सव मनाने जब जन्म भूमि गए तो मंदिर के विशाल भवन के शिखर पर उन्होंने भगवा ध्वज फहरा दिया। मंदिर शिखर पर विजय पताका फहराता देख राम भक्तों में खुशी का संचार हो गया।

राम भक्तों ने 1990 में राम मंदिर कारसेवा आंदोलन शुरू किया, इसी साल भाजपा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह पार्टी के 21 विधायकों के साथ अयोध्या राम मंदिर दर्शन करने आए, उन्होंने वेद प्रकाश गुप्ता को भाजपा की विधिवत सदस्यता दिला दिया। कार सेवा आंदोलन चरम पर था इसी मत 1991 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हुई। श्री गुप्ता बताते हैं कि भाजपा ने उन्हें अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया, उन्होंने पर्चा भी दाखिल कर दिया। इसी बीच सियासत के चक्रव्यूह के चलते पार्टी नेतृत्व ने दाखिल पर्चा को वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया। उनसे कहा गया कि वह रुदौली विधानसभा क्षेत्र से पर्चा दाखिल कर चुनाव लड़े। वो बताते हैं कि उन्होंने इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया कि वह केवल अयोध्या विधानसभा क्षेत्र की सेवा करेंगे। श्री गुप्ता कार्य सेवा आंदोलन निष्ठा पूर्वक जुड़े रहे, इस समय वह विश्व हिंदू परिषद और भाजपा के बड़े नेताओं के संपर्क में आए और  साथ ही उन्होंने व्यापार मंडल से जुड़कर व्यापारियों के हक-हकूक के लिए संघर्ष करना शुरू किया।

अंतत: अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक होने का सपना साकार हो ही गया। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि प्रभु श्री राम ने बड़ी परीक्षा लिया और जब उन्होंने कृपा की तो वह जन्म भूमि के विधायक बन गए। आज वह जो भी हैं वह प्रभु राम की कृपा ही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रशिक्षण शिविर आईटीसी 1993 में गोसाईगंज में आयोजित हुआ था जहां प्रशिक्षण लेने के बाद वह संघ के प्रशिक्षित स्वयंसेवक बन गए। वह बताते हैं कि 1 फरवरी 1987 के दिन जब अदालत ने जन्म भूमि का ताला खोलने का आदेश दिया तो पूरे नगर में दीपावली जैसा वातावरण बन गया, लोग भाव विभोर थे और राम भक्तों का सारा दर्द प्रभु राम का मुख देखकर गदगद था।
विधायक वेद प्रकाश गुप्‍ता
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