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होइहि सोइ जो राम रचि राखा…!

रवि गुप्ता

-सामान्य हुआ अयोध्या प्रकरण, प्रशस्त हुआ मंदिर निर्माण का मार्ग
-राम नगरी में भूमि पूजन समारोह आज, स्थल पर विरोधाभासी भी दिखेंगे एक साथ
-कोई पत्र के जरिये तो कोई चुप्पी साधकर समारोह की सफलता का कर रहा गुणगान
-अयोध्या वासियों का मानना, राम मंदिर मुद्दा नहीं उनके लिये हमेशा रहा आस्था का प्रतीक

लखनऊ (तरुणमित्र) 2 अगस्त। होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा…सैकड़ों वर्ष पहले
गोस्वामी तुलसी दास द्वारा मानस में उल्लिखित यह पंक्तियां आज कलियुग में फिर से चरितार्थ होती दिख रही हैं। अयोध्या धाम में जिस राम मंदिर निर्माण को लेकर बीते तीन दशक से समाज के तमाम वर्गों की अलग-अलग रायशुमारी रही…एकदूसरे पर तर्क-वितर्क चलता रहा, वाद-प्रतिवाद होते रहें, वार-पलटवार चलता रहा, विरोध-अन्तर्विरोध होता रहा…लेकिन अब वही सब किसी न किसी रूप में एक मंच पर आते देख जा सकते हैं। यही नहीं अब तो सब खुलेमन से मंदिर निर्माण को लेकर प्रफुल्लित भी लग रहे हैं…यानी इसमें यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आखिर में वही हुआ जो प्रभु राम की इच्छा रही। मंदिर आंदोलन से जुडेÞ कई वरिष्ठ जानकारों का तो यह भी मत है कि राम नगरी से निकले जिस मुद्दे ने पूरे भारतवर्ष की राजनीतिक दशा और दिशा को उलट-पलटकर रख दिया, इस राजनीतिक फेर में केंद्र से लेकर सूबे में कई दलों की सरकारें आई और गर्इं, उसी लहर में कई दलों का प्रादुर्भाव हुआ तो कई जमींदोज हो गये, अब वही मुद्दा मंदिर निर्माण भूमि पूजन के तौर पर मूर्तरूप लेते हुए जिस साधारण, शांत और सकारात्मक माहौल में सम्पन्न होता दिख रहा है…वाकई यह भगवान राम के ही वश का कहा जा सकता है।
राजनीतिक नजरिये से गौर करें तो जिस अयोध्या प्रकरण को लेकर देश की दो सबसे बड़ी पार्टियां एकदूसरे की घुर विरोधी रहीं, अब उसी में से एक दल की प्रमुख नेता राम मंदिर निर्माण के तहत किये जा रहे भूमिपूजन समारोह की सफलता के गुणगान करती दिख रही हैं। इतना ही नहीं उक्त प्रकरण के जरिये कुछ ऐसे दल जिनको उस समय देश के राष्ट्रीय फलक पर लम्बी राजनीतिक उड़ान मिली, आज उन्हीं पार्टियों के सिरमौर भी चुप्पी साधे हुए हैं। इसी कड़ी में अयोध्या धाम की बात करें तो वहां के कई स्थानीय लोगों का आज भी यही मानना है कि उनके लिये तो मंदिर निर्माण कोई मुद्दा कभी रहा ही नहीं, बल्कि यह हमेशा उनके आस्था और विश्वास का प्रतीक रहा। इन लोगों का कहना रहा कि उन्हें तो शुरूआती चरण से यही आभास रहा कि जब प्रभु राम की इच्छा होगी, तो अपने आप मंदिर-मस्जिद मुद्दा सुलझ जायेगा और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चलेगा। संभवत: अयोध्या वासियों के अर्न्तमन में राम को लेकर चल रहे इन संवेदनाओं का सूक्ष्मता के साथ विश्लेषण किया जाये तो कहीं न कहीं उनकी ये बातें सत्यता के काफी निकट प्रतीत होती दिख रहीं हैं…तभी तो भूमि पूजन समारोह में वो प्रमुख लोग भी शिरकत कर रहे हैं जिनका मत पूर्व में भिन्न-भिन्न सा रहा

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