कारोबार

नगद रूपयों में होने वाली सोने की खरीद होगी खत्म, रखा जायेगा सभी लेनदेन का रिकार्ड

नई दिल्ली। सोना व रत्नों को ई-वे बिल के दायरे में लाने के लिए जीएसटी परिषद की होने वाली बैठक में विचार होने की उम्मीद है। सूत्रों से मिल रही जानकारी मे यह बात सामने आयी है कि राज्यों की ओर से सोने की चढ़ती कीमतों के बीच कर चोरी की बढ़ती घटना को देखते हुए यह प्रस्ताव भेजा जा सकता है।

सोने को ई-वे बिल के अंदर में लाने की मांग सबसे पहले केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कर चोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि वैट काल में सोने पर लगने वाले कर से केरल को 627 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था जो अब घटकर सिर्फ 220 करोड़ रह गया है। इस कर चोरी को रोकने के लिए जल्द से जल्द सोने को ई-वे बिल के दायरे में लाना जरूरी है। वह इस मुद्दे पर दूसरे राज्यों के वित्त मंत्रियों से मदद भी मांग रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कर चोरी की बढ़ती घटना को देखते हुए दूसरे राज्य भी जीएसटी परिषद की बैठक में सोने को ई-वे बिल के अंदर में लाने का दबाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर बनाएं। राज्य के साथ केंद्र सरकार भी जीएसटी कर संग्रह से परेशान है। कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण जीएसटी संग्रह में बड़ी कमी आई है। ऐसे में इस पर जल्द फैसला होने की भी उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार, कर चोरी और जीएसटी अनुपालन कड़ा करने के लिए सोने पर ई-वेल बिल शुरू करने का प्रस्ताव आगे बढ़ाने के लिए मंत्रियों का समूह बैठक करने जा रहा है। मंत्रिसमूह ई-वे बिल के एक सुरक्षित संस्करण की समीक्षा करेगा। केरल का कहना है कि अगर देश के दूसरे राज्यों में यह व्यवस्था लागू नहीं होती है तब भी उसे अपने यहां सोने पर ई-वे बिल लागू करने की अनुमति दी जाए। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल भी इस मंत्रिसमूह का हिस्सा हैं। मंत्रिसमूह कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए दूसरे उपाय भी सुझाएगा। पिछले वर्ष मंत्रिसमूह के कुछ सदस्यों का मत था कि ई-वेल के बजाय दूसरे अन्य उपायों पर विचार करने की जरूरत है।

सोने को ई-वे बिल के दायरे में लाने से पहले एक तय प्रारूप बनना जरूरी होगा नहीं तो आम लोगों को समस्या होने लगेगी। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि देश में 50,000 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं के परिवहन के लिए ई-वे बिल अनिवार्य। ऐसे में अगर कोई अपनी पत्नी या बच्चे के लिए सोने की ज्वैलरी खरीदता है तो वह भी इस दायरे में आ सकता है। इस स्थिति में टैक्स अधिकारी को जांचना मुश्किल होगा। इससे बचने के लिए आम लोगों को एक तय सीमा तक सोने की खरीद पर छूट देना जरूरी होगा।

सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि सोने का एक बड़ा कारोबार नकद होता है। ई-वे लागू से नकद में होने वाला सोना का कारोबार खत्म हो जाएगा। ऐसा इसलिए कि ई-वे बिल लागू होने से सभी लेनदेन का रिकॉर्ड होगा और इसका असर सोने की कीमतों पर देखने को मिलेगा। सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी इसके बाद देखने को मिल सकती है।   50,000 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं के परिवहन में ई-वे बिल अनिवार्य  2018 में अंतरराज्यीय परिवहन के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था शुरू की गई थी 03% जीएसटी और तीन फीसदी पेनल्टी देकर गैरकानूनी सोने के कारोबार वाले छूट जाते हैं।

 

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