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टीका लगाने के दूसरे दिन दो बच्चों की मौत,मचा कोहराम, विटामिन और टीका सील,जांच के आदेश 

कानपुर। शहर के सरसौल ब्लॉक के रामनगर और पताखेड़ा गांव में दो मासूम बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गुरुवार को एएनएम ने बच्चे को टीका और विटामिन ए की खुराक दी थी। इसके बाद बच्चे सुस्त पड़ गए थे। इसी कारण से दोनों की मौत हुई है। एक की उम्र 3 माह तथा दूसरे की 6 माह बताई गई है। पुलिस ने दोनो बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। सीएमओ डॉ. अनिल मिश्रा का कहना है कि टीके की जांच कराई जाएगी।

जिस बैच के टीके  बच्चों को लगे थे, उसे लगाने पर रोक लगा दी गई है।
गुरुवार से पूरे प्रदेश में बच्चों को विटामिन ए की खुराक देने का अभियान शुरू किया गया था। रामनगर गांव के गंगा राम के 03 माह के बच्चे को विटामिन ए की खुराक पिलाई गई थी। पताखेड़ा गांव के बड़े साहू के 6 माह के बेटे शिवांशु को टीके लगाए गए थे। बताया गया कि इस बच्चे के पैदा होने के बाद से कोई टीके नहीं लगे थे। परिवार के लोगों का आरोप है कि विटामिन की खुराक देने और टीके लगाने के बाद बच्चे सुस्त पड़ गए थे। देर रात दोनों बच्चों की मौत हो गई।

परिवार के लोग हाथीपुर पीएचसी लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। इसके बाद घर लेकर चले गए। शुक्रवार सुबह बड़े साहू के बच्चे का शरीर गर्म होने पर निजी अस्पताल ले गए, जहां से उर्सला मंडलीय अस्पताल रेफर कर दिया। जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। परिवार के लोगों के लोगों ने हंगामा शुरू किया तो स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हुई। मौके पर एसीएमओ (टीकाकरण) डॉ.अमित कनौजिया को भेजा गया। बच्चों को दी गई दवा के सैंपल सुरक्षित किए गए। पुलिस ने दोनों बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं।
सीएमओ बोले,चार बिंदुओं पर जांच करेंगे
सीएमओ डॉण् अनिल मिश्रा का कहना है कि कोई भी वैक्सीन कई स्तर की जांच के बाद ही लांच की जाती है। टीका या विटामिन की गुणवत्ता खराब होने का सवाल नहीं पैदा होता। फिलहाल एसीएमओ प्रतिरक्षण के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर दी गई है। कुछ एएनएम तथा कुछ प्राइवेट संस्थानों के जरिए टीकाकरण कराया गया था। जिस बैच की विटामिन की खुराक और टीका लगाया गया था उसे सील कर दिया गया है।
कहीं दवा का कोई रियेक्शन तो नहीं

सीएमओ का कहना है कि बच्चों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम से पहले बच्चों का कोरोना टेस्ट होगा। इस बात की भी जांच होगी कि पीएचसी पर रात में डॉक्टर थे या नहीं। इसके अलावा हम यह भी पता लगाएंगे कि बच्चों के बीमार होने के बाद परिवार के लोग डॉक्टरों के यहां ले गए थे। वहां क्या दवा दी गई। कहीं उस दवा का कोई रियेक्शन तो नहीं हुआ। बच्चों को उर्सला मंडलीय अस्पताल ब्राड डेड लाया गया था।
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