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पंचायत चुनाव से पहले ग्राम प्रधान के पद हुए कम, जानें किसे किया गया चुनाव प्रक्रिया से बाहर

लखनऊ। प्रदेश में इस बार गांव की सरकार छोटी हो जायेगी। वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव के बाद राज्य में कोई नई ग्राम पंचायत तो गठित नहीं हुई लेकिन सैकड़ों पंचायतें पूर्णत: या आंशिक रूप से शहरी क्षेत्रों में जरूर शामिल कर ली गईं।

पंचायतीराज विभाग नगर निगम या नगर पंचायत में पूर्णत: या आंशिक रूप से शामिल की गई ग्राम पंचायतों का ब्योरा तैयार कर रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायतीराज विभाग से अभी तक मिली सूचना के अनुसार प्रदेश की 587 ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से और 680 पंचायतें आंशिक रूप से शहरी क्षेत्रों में शामिल की जा चुकी हैं। जो 680 ग्राम पंचायतें आंशिक रूप से शहरी क्षेत्र में शामिल हुई हैं, अगर उनकी आबादी एक हजार से कम हो गई है तो अब ऐसी पंचायतों के बाकी बचे वार्ड किसी अन्य पंचायत में शामिल किए जा सकते हैं। अब तक की स्थिति के अनुसार ग्राम प्रधानों के 587 पद खत्म हो गए हैं। इसी क्रम में करीब दो से तीन हजार ग्राम पंचायत सदस्यों के पद भी खत्म होने की बात है।

बताया जा रहा है कि जो पंचायतें पूरी तरह शहरी क्षेत्र में चली गई हैं वहां ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य के पद खत्म हो गए हैं। जो पंचायतें आंशिक रूप से शहरी क्षेत्र में शामिल की गई हैं, उनके बारे में सरकार को निर्णय लेना होगा कि 1000 की आबादी से कम होने पर उस पंचायत का अस्तित्व कायम रहेगा या फिर उसके बाकी बचे वार्ड किसी अन्य पंचायत में शामिल किए जाएंगे।

2015 में हुए पंचायत चुनाव में :

– 59,162 ग्राम प्रधान चुने गये

– 7,42,269 ग्राम पंचायत सदस्य

– 821 क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष

– 75,576 क्षेत्र पंचायत सदस्य

– जिला पंचायत सदस्य-3,112

– जिला पंचायत अध्यक्ष -75

 

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