Monday, October 19, 2020 at 12:35 AM

फिल्मी सितारों के आगे दुनिया और भी है – डाॅ पी के सिन्हा

तरूण मित्र ब्यूरो रिर्पोट

चंदौली ब्यूरो। आज के सौ साल बाद भी यदि कोई शोध शोधार्थी 21 वीं शताब्दी के कोरोनाग्रस्त भारत पर शोध करना चाहेगा तो उसे एक अद्भुत आश्चर्य का सामना भी करना पड़ेगा।वर्तमान समय के न्यूज, बी डी ओ,चैनल,समाचार पत्र देखकर उसे लगेगा कि भारत में 2020 में सबसे बड़ी समस्या कुछ फिल्मी सितारों की नशाखोरी से थी। करोना,चीनी सेना का अतिक्रमण,रोजगार,आर्थिक बदहाली,किसानों की दयनीय दशा उसे सिर्फ समाचार चैनलों तक ही सिमित दिखाई देगा।यह भारत के मीडिया की ताकत व त्रादसी दोनो है। वह अनजाने इतिहास की वर्तमान ब्याख्या को चलाया। इसे विना जाने समझे इसका इसर कितने दूरगामी होंगे। कास भारतीय टी वी मीडिया इन सभी समस्याओं पर सन्तुलन स्थापित करना जान जाता। भारत में फटाफट खबरों की आपाधापी में हमारी स्मृतियों को कुन्द करना प्रारम्भ कर दिया। यही कारण है कि हम 2017 में पंजाब का चुनाव ड्रग एवं नसे के मुद्दे पर लड़ा गया था। पंजाब में अमरेन्दर सिंह ने इसे अपने चुनावी मुद्दे पर खूब भजाया था। जिसका परिणाम यह है कि वे आज पंजाब के मुख्यमंत्री है। यह समस्या कितनी गम्भीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल 25 जून को  लोकसभा मे जो आंकड़े पेश किये गये उनके अनुसार 2017 में नशे के पदार्थो की तस्करी के 47344 माामले दर्ज किये गये थे। इसमें सबसे ज्यादा पंजाब में 12439, केरल में 8440, उ0प्रदेश में 6693 मामले सामने  आये थे। लेकिन उसी वर्ष एन सी वी के अनुसार उसी वर्ष नसीले पदार्थो के नीजी सेवन के सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र में दर्ज किये गये थे। 14634 मामले में 96 प्रतिशत मामले निजी इस्तेमाल से जुड़े थे। इसके बाद पंजाब का स्थान था। नेशनल क्राइम ब्यूरो के अनुसार महाराष्ट्र निजी नशाखोरी के मामले में देश में पहले नम्बर पर है। तो आजकल मुम्बई में जो धड़ पकड़ हो रही  है वह समाज के लिए विल्कुल सही कदम है। पर इसे लोग ड्रग्स को इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ देशभर मे लम्बा अभियान चलाने की जरूरत है।तभी भारत की निर्माता हमारी युवा पिढ़ी इस भयानक चपेट से बच सके। सम्भावना है कि ड्रग माफियाओं की सफाई का अभियान मुम्बई मायानगरी के चन्द सितारों तक सिमित होकर नही रह जाय। अगर ऐसा हुआ तो इसे इतिहास कभी नही माफ कर सकेगा।

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