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अंसल हाईटेक के खिलाफ एफआईआर के आदेश


गौतमबुद्ध नगर-नोएडा। शहर में बढ़ते हुए बिल्डरों के आतंक के दिन अब समाप्त होते दिखाई दे रहे हैं, अंसल हाईटेक टाउनशिप लिमिटेड के खिलाफ दर्ज़ किये गए एक मुकदमें में ज़िले की एक अदालत ने कंपनी के छह डायरेक्टर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ करवाने के आदेश किये हैं। याची दिनेश दुआ द्वारा दायर की गई याचिका को सुनते हुए अदालत ने यह आदेश पारित किया।
केस के अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने संवाददाताओं को बताया कि अंसल हाईटेक ने बोड़ाकी में अपने प्रोजेक्ट सुशांत मेगापोलिस के आस्था प्राइड टावर में फ्लैट दिलवाने के एवज़ में वादी से छह लाख बीस हज़ार से ज़्यादा की रकम 2012 में ही जमा करवा ली। जिसके बाद सन 2015 में फ्लैट का पजेशन देने की बात कही गई, यह वादा भी किया गया था। इसका 20 प्रतिशत पैसा वादी को देना होगा और बाकी बैंक द्वारा आसान किश्तों पर दे दिया जाएगा। जब दिनेश दुआ ने बैंक से इस बाबत जानकारी मांगी तो उन्होंने साफ़ इंकार करते हुए कहा के यह प्रोजेक्ट उनके बैंक द्वारा अप्रूव ही नहीं है।
इसके बाद वादी ने अपने पैसे मांगने शुरू किये तो बिल्डर के प्रतिनिधियों ने उल्टा उन्हें नोटिस थमा दिआ के समय से पेमेंट न करने के कारण उनके द्वारा जमा किये गए पैसे जब्त किये जाएंगे , जिसके बाद वादी ने 2015 में बोड़ाकी , गौतम बुध नगर स्थित साइट पर जाकर निरिक्षण किआ तो पता लगा के वहां तो अभी निर्माण शुरू भी नहीं किआ गया।
वाद के सह अधिवक्ता रंजन तोमर एवं मनीष राजौरा ने बताया के 2017 में भी उस जगह किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं हुआ है। वादी द्वारा दी गई दलीलों को प्रथमद्रष्टया सच मानते हुए अदालत ने थानाध्यक्ष थाना दादरी को आदेश दिया है कि वह इस मामले में उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना करवाएं एवं कार्यवाही से न्यायालय को अवगत करवाएं।
गौरतलब है के अंसल ग्रुप के खिलाफ इस क्षेत्र में यह पहली एफआईआर है। जहां नोएडा में फ्लैट खरीददार बिल्डरों से पीड़ित होकर नेताओं और प्राधिकरण की दरों की ठोकर खा रहे हैं, वहीं इस मामले में अदालत द्वारा उठाये गए कड़े क़दमों से खरीददारों में ख़ुशी की लहर और उम्मीद की किरण दौड़ गई है।

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