Monday, March 8, 2021 at 9:43 AM

कमिश्नर प्रणाली के एक साल, कम नहीं हुआ अपराध

कमिश्नर प्रणाली के एक साल, कम नहीं हुआ अपराध
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू हुए एक साल पूरे हो गए। अपराध नियंत्रण के लिए कमिशनर प्रणाली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जनवरी को लागू की थी। लखनऊ का पहला कमिश्नर आईपीएस अधिकारी सुजीत पांडये को बनाया गया था। उनके बाद कमिश्नर का कार्यभार आईपीएस डीके ठाकुर को सौंपा गया। इसके अलावा नोएडा में ही पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया था। इस दौरान लखनऊ को कई सौगातें मिलीं। हालांकि, अपराध पर नकेल नहीं कसा जा सका। साइबर अपराध की भरमार रही। करीब एक साल में 2750 साइबर अपराध के मामले साइबर क्राइम सेल में आए। हत्या और डकैती की घटनाओं ने लोगों को डराया तो गैंगवार की दस्तक ने सवाल खड़े किए। हालांकि कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस ने कोरोना काल में लोगों की मदद करके शहरवासियों का दिल जीता। साल भर के भीतर कई अपराधी मुठभेड़ के दौरान तो दर्जनों अपराधी विभिन्न मामलों ने गिरफ्तार करके जेल भेजे गए। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद कई पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई जिनकी निगरानी में थाना स्तर के कर्मचारी काम कर रहे हैं। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद उतना अपराध नहीं कम हो पाया जितना लोगों को उम्मीद थी। यह व्यवस्था लागू होने के बाद अपराधी बेख़ौफ़ होते नजर आ रहे हैं और सरेराह गोलियां तड़तड़ाकार दहशत फैलाते रहे। हालांकि एक साल में कई डबल मर्डर और लूट की घटनाएं भी हुई जिनका पुलिस ने खुलासा करके सलाखों के पीछे भजे दिया।
लॉक डाउन में निभाई अहम भूमिका
कोरोना महामारी में लॉक डाउन के दौरान कमिश्नरेट पुलिस ने संकटमोचन के रूप में काम किया। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था नवीन अरोड़ा ने कोरोना कॉल में नागरिकों की सुरक्षा को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने खुद सड़कों पर उतरकर नागरिकों को जागरूक किया ही बल्कि हॉट स्पॉट वाले इलाकों में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों की सेहत का भी ख्याल रखा। जेसीपी ने पुलिसकर्मियों के लिए चाय, और काढे की व्यवस्था करवाई। इसके अलावा सेनेटाइजर, मास्क के अलावा हर जरूरत का सामान नागरिकों के घर घर पहुँचाया। पुलिस ने दिन रात मेहनत करके लोगों का दिल जीत लिया। जेसीपी के कार्य की सोशल मीडिया से लेकर हर जगह तारीफ हो रही है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद जेसीपी ने वीमेन पॉवर लाइन 1090 चौराहा पर एक कार्यक्रम का आयोजन कर हर वर्ग के लोगों को आमंत्रित किया और उन्हें सम्मानित भी किया। जेसीपी ने कहा कि पुलिस को जनता ने कोरोना वॉरियर माना है इसलिए हमें बेहद प्रसन्नता है। उन्होंने कहा कि प्रसन्नता इस बात की है कि हम उनकी सोच को सफल साबित करने में सफल रहे।
कई त्यौहार पुलिस ने कराये सकुशल संपन्न 
जेसीपी नवीन अरोड़ा ने कोरोना कॉल में पड़े बड़े त्यौहारों का बखूबी नेतृत्व करते हुए उन्हें सकुशल संपन्न कराया। एक तो कोरोना कॉल में पुलिस के आगे बड़ी चुनौतियाँ थी लेकिन जेसीपी ने सभी धर्मगुरुओं व्यापारियों और संभ्रांत नागरिकों के साथ बैठक कर के सभी बड़े त्यौहारों रमजान, ईद, बकरीद, मुहर्रम, गणेश उत्सव, दुर्गापूजा, दीवाली, सहित कई प्रमुख त्यौहारों के अलावा क्रिसमस डे को सकुशल संपन्न कराया।
 
कमिश्नरेट में चलाए गए कई अभियान
राजधानी पुलिस ने एक साल में कई अभियान भी चलाए। इनमें नमस्ते लखनऊ, ऑपरेशन ऑल आउट, मिशन शक्ति समेत अन्य शामिल रहे। इस दौरान पॉलिगन सिस्टम की शुरुआत हुई थी। लखनऊ में पुलिस बल की संख्या बढ़ाई गई। ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती। बिना मास्क के घर से निकलने वालों के खिलाफ भी खूब अभियान चला और दो करोड़ से अधिक रुपये के चालान भी कटे। एक साल में बदमाशों ने करीब 10 करोड़ की संपत्ति पार कर दी। हालांकि, यह आंकड़ा वर्ष 2018 में 15 करोड़ और 2019 में 17 करोड़ का था। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 की अपेक्षा अपराध में कमी आई है। कोरोना काल में लॉकडाउन को भी इसका कारण माना जा रहा है। राजधानी पुलिस कोरोना काल में लोगों के लिए मददगार बनकर सामने आई और अपनी छवि में सुधार किया।
घटनाएं जो चर्चा में रहीं
पुलिस आयुक्त प्रणाली के लागू होते ही हजरतगंज में रणजीत बच्चन हत्याकांड ने पुलिस को चुनौती दी। वजीरगंज में डकैती, गोमतीनगर विस्तार में छात्र की चाकू मारकर हत्या, थाने की लॉकअप में युवक की मौत, बद्री सर्राफ के मालिक को गोली मारने, जहरीली शराब से चार लोगों की मौत, चिनहट में लूटपाट, विभूतिखंड में डकैती, मोहनलालगंज व्यापार मंडल अध्यक्ष की हत्या और अजीत ङ्क्षसह हत्याकांड। ये घटनाएं पुलिस के लिए चुनौती और राजधानी में चर्चा का कारण रहीं।
 
विवेचना निस्तारण पर दिया जा रहा जोर
राजधानी लखनऊ के दूसरे पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने बताया कि वह थानों में लंबित विवेचनाओं के निस्तारण पर जोर दे रहे हैं। वह थानों में जाकर लंबित मामलों की रिपोर्ट ले रहे हैं। जनसुनवाई पर पुलिस आयुक्त की प्राथमिकता है। एक साल में महिला संबंधी अपराधों की विवेचनाओं में तेजी आई। अपराधियों पर कार्रवाई और तमाम बातों पर वह जल्द प्रेसवार्ता के ,माध्यम से विस्तृत जानकारी देंगे।

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