Monday, March 8, 2021 at 9:24 PM

गणतंत्र के लिए आदर्श हैं डीजीपी एस के सिंघल, एक मैसेज और मिस्ड कॉल पर करते है कॉल बैक

 मोबाइल गुम होने का सनहा से लेकर एफआईआर तक का देते है सीधा निर्देश

>> दिल्ली के पत्रकार को कुछ असमाजिक तत्वों ने बना लिया था बंधक ,डीजीपी ने अविलंब लिया एक्शन

>> हाई प्रोफाइल रूपेश हत्याकांड में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की कर रहें प्रतिदिन समीक्षा

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । गणतंत्र में आम जनता को उचित  अधिकार मिले और किसी का शोषण न हो इसमें पुलिस की प्राथमिकता अत्यधिक होती हैं  । न्याय की आस और सुरक्षा को लेकर पीडि़त व्यक्ति सबसे पहले पुलिस के पास जाता हैं । कभी-कभी पुलिस के दुर्व्यवहार का शिकार भी होना पड़ता हैं लेकिन वरीय पुलिस पदाधिकारियों के संज्ञान में जब मामला आता है तो कार्रवाई भी होती हैं । बिहार पुलिस के प्रति लोगों में सम्मान बढ़े और विश्वास जगे इसके लिए डीजीपी एस के सिंघल आदर्श हैं और पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणाश्रोत। पुलिस संबंधित किसी भी परेशानी को लेकर कोई व्यक्ति डीजीपी के पास कॉल करता है तो सीधा संपर्क स्थापित तो होता ही हैं ,त्वरित कार्रवाई का निर्देश भी संबंधित पदाधिकारी को दिया जाता हैं । अगर सरकारी मीटिंग में है और किसी कारणवश फोन नहीं उठता है तो मैसेज करने पर डीजीपी एस के सिंघल सीधे कॉल बैक करते हैं । और उक्त पीडि़त व्यक्ति के समस्या का अविलंब निदान हो जाता हैं । पत्रकारों द्वारा दी गयी सूचनाएं पर डीजीपी स्वयं गंभीरता से लेते हैं और कॉल बैक कर सही तथ्यों की जानकारी देते हैं । डीजीपी एस के सिंघल ,अपने मातहत पुलिस पदाधिकारियों ,अधिकारियों को हिदायत देते रहें है की गणतंत्र की व्यवस्था है और इसके हित में काम करने का कर्तव्य सभी को बनता हैं ।

पत्रकार के रिश्तेदार का सनहा और एफआईआर

दैनिक अखबार के ग्रामीण पत्रकार रवी प्रकाश के रिश्तेदार का मोबाइल गुम हो गया । सनहा दर्ज करने के लिए पीडि़त व्यक्ति पुलिस थाना में आवेदन दिया । संबंधित पुलिस पदाधिकारी ने सनहा दर्ज करने के लिए मोबाइल के बिल और एक शपथ -पत्र की मांग किया गया । और संबंधित पुलिस पदाधिकारी ने कहां की सारा प्रक्रिया कर कल आना । पत्रकार रवी प्रकाश ने बिहार के डीजीपी एस के सिंघल को सारे बातें लिखते हुये मोबाइल पर मैसेज किया । पत्रकार रवी प्रकाश ने बताया की 15 मिनट बाद डीजीपी साहब स्वयं फोन किये और पुरी जानकारी लेने के साथ ही पीडि़त व्यक्ति का नंबर लेकर फोन किये और मात्र 15 मिनट के अंदर सनहा दर्ज कर एक कॉपी पीडि़त व्यक्ति के हाथों में सौंप दिया गया वहीं आगे से ऐसी गलती नहीं करें संबंधित पुलिस पदाधिकारी को हिदायत भी दिया ।
  ऐसा ही हालिया एक और वाक्या सामने आया हैं । दैनिक सप्ताहिक अखबार के पत्रकार विवेक कुमार के रिश्तेदार के साथ जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हुई । एक पक्ष का पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया वहीं पत्रकार विवेक कुमार के रिश्तेदार का पुलिस शिकायत लेने से इंकार करने लगी । उक्त पत्रकार ने लिखित आवेदन वाट्सअप से डीजीपी को भेज दिया । एक घंटे के अंदर संबंधित पुलिस थाने ने पीडि़त व्यक्ति को बुलाया एफआईआर किया और डीजीपी ने पत्रकार विवेक कुमार को एफआईआर नंबर तक दे दिये ।

पत्रकार बनें बंधक ,डीजीपी ने छुड़ाया और सुरक्षित पहुंचाया

दिल्ली के पत्रकार राजेश कुमार बिहार के छपरा जिले में एक पति-पत्नी के समझौता में गये थे। लड़की पक्ष की बातें को रख रहें थे और महिलाएं के साथ सम्मान करने की सिख दे रहें थे। बात इतना बिगड़ गया की ससुराल पक्ष वाले ने पत्रकार राजेश कुमार सहित चार लोगों को बंधक बना लिया और मारपीट पर उतारू हो गये । पत्रकार राजेश कुमार ने डीजीपी एस के सिंघल को फोन किया और घटना की विस्तृत जानकारी दिया । डीजीपी ने त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश एसपी छपरा को दिया । ससुराल पक्ष वाले के खिलाफ दहेज पड़तारना का एफआईआर दर्ज किया गया वहीं पत्रकार राजेश कुमार ,पीडि़त लड़की और इसके पिता और भाई को सुरक्षित गांव से निकालकर ठिकाने पर पहुंचाया गया ,चुकी विवादित इलाका नक्सली क्षेत्र था।  पत्रकार राजेश कुमार आज भी डीजीपी एस के सिंघल के त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा करते नहीं थकते ।

रूपेश हत्याकांड में सही अपराधियों को सलाखो के पीछे डालने को संकल्पित

राजधानी में हाल की घटना इंडिगो एयरलाइंस स्टेशन हेड रूपेश कुमार की हत्याकांड में शामिल अपराधियों को सलाखों के पीछे डालने के लिए सूबे के डीजीपी एस के सिंघल संकल्पित हैं । डीजीपी प्रतिदिन एसआईटी के कार्रवाई की समीक्षा करते हैं । डीजीपी एस के सिंघल का मानना है की पुरी पुलिस टीम सक्रियता से अपराधियों के पीछे जुटी हैं । पुलिस किसी के दबाव में काम नहीं कर रही । घटना में जो सही रूप से अपराधी है वह पकड़े जाएंगे ,चाहें कोई कितना ही बड़ा हैसियत का नहीं हो। देर से नहीं बल्कि दुरूस्त कार्रवाई होगी । डीजीपी का मानना है की पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता और निष्पक्षता होती है तो गणतंत्र में कानून के प्रति विश्वास जगता है।
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