उत्तर प्रदेशलखनऊ

पुलिस की मानवता: गंदे और बदबूदार तालाब से दारोगा ने निकाली लाश

लखनऊ। वैसे तो आप ने पुलिस के कई चेहरे देखे होंगे, जिन्हें देखकर आप को गुस्सा आता होगा और मुंह से गलियां भी निकलती होंगी। लेकिन आज हम आप को पुलिस के एक ऐसे चहेरे के बारे में बताएंगे जो अन्य पुलिसकर्मियों के लिए एक आईना है। जी हां! राजधानी लखनऊ के पीजीआई थाने में तैनात एक दारोगा अरुण कुमार चतुर्वेदी ने मानवता पेश करते हुए अपनी वर्दी उतार दी और तालाब के गंदे बदबूदार पानी में घुसकर तालाब में पड़ी लापता युवक की लाश को मल्लाह ना मिलने पर खुद ही नाव पर बैठकर एक युवक को साथ लेकर बाहर निकालकर पीएम के लिए भेजा। चौकी इंचार्ज के इस मानवीय चेहरे की तस्वीरें शोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही हैं। सोशल मीडिया पर इस वर्दीधारी की खूब प्रशंसा हो रही है।

63 घंटे बाद बरामद हुआ लापता युवक का शव
गौरतलब है कि, शनिवार रात 11:00 बजे किसी बात को लेकर गुस्साया भीम टोला निवासी धर्मेंद्र अपने भाई का हाथ झटक कर घर से आया और पीजीआई के तेलीबाग इलाके में स्थित विनायकी तालाब में कूद गया था। इसके बाद उसकी तलाश के लिए गोताखोरों को लगाया गया था। दो दिनों तक कुछ पता नहीं चलने पर तलब में पानी और जलकुंभी निकालने के लिए JCB और पंपसेट लगाए गए थे।

63 घंटे बाद तालाब में पानी कम होने पर धर्मेंद्र का शव दिखाई दिया। परिवारीजनों का गुस्सा देखते ही तेलीबाग चौकी प्रभारी अरुण कुमार चतुर्वेदी शव निकालने के लिए खुद वर्दी उतारकर तालाब में उतर गए। बाद में एक युवक की मदद से काफी मशक्कत के बाद नाव के सहारे शव को खींचकर बाहर निकाला। 3 दिन से लापता बेटे की तलाश कर रही मां प्रेमा तालाब में शव देखकर दहाड़ मारकर रोने लगी। सैकड़ों लोगों के बीच पुलिस तालाब से शव बाहर निकालकर लाई। तो प्रेमा ने शव से लिपटने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे रोक लिया। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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