Friday, March 5, 2021 at 7:26 AM

सुनील गावस्कर- ने कहा कि एक बार फिर…

टीमें बहुत अच्छे से होमवर्क करती हैं और जानती हैं कि उन्हें अपनी टीमों को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्हें पता है कि कौन सी जगह भरनी है और किस खिलाड़ी की जरूरत है इसलिए बीसीसीआइ ने कुछ खिलाड़ियों की सूची जारी की जबकि नीलामी के लिए कई हजार नाम शामिल थे। फिर सूची में शामिल अंतिम खिलाड़ियों की नीलामी शुरू हो जाती है जिसमें बहुत करोड़पति बन जाते हैं जबकि कुछ खुद को यह सांत्वना देते हैं।

भाग्य भी अहम भूमिका निभाता है। अगर फ्रेंचाइजी के पास अधिक राशि है तो वे ज्यादा बड़ी बोली तक लगा देते हैं और जब उनके पास राशि कम होती है तो उनका उत्साह भी कम हो जाता है। खिलाड़ी भी अपने आधार मूल्य से अधिक राशि पा लेते हैं। एक बार फिर इस साल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने बड़ी कमाई की जो आश्चर्यचकित करता है।

अनिल कुंबले और महेला जयवर्धने ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के नहीं हैं और जयवर्धने के मार्गदर्शन में मुंबई इंडियंस ने लगातार दो बार खिताब जीता है। भारतीय क्रिकेट टीम शीर्ष स्तर का क्रिकेट खेल रही है और इसमें पूरा सहयोगी स्टाफ भारतीय है जो दिखाता है कि भारत में कोचिंग की प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

विदेश के क्रिकेट संघों को फ्रेंचाइजी द्वारा चयनित किए गए खिलाडि़यों की मैच फीस का 10 प्रतिशत मिलता है इसलिए प्रत्येक नीलामी के बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के क्रिकेट बोर्ड अमीर हो जाते हैं। हालांकि फ्रेंचाइजियों द्वारा खिलाडि़यों की मैच का फीस का प्रतिशत और इसमें से कितनी कटौती की गई है या नहीं इसको लेकर मैं निश्चित नहीं हूं।

आइपीएल नीलामी पर नजरें रखते हैं क्योंकि यदि उनके देशों के खिलाड़ियों को चुना जाता है तो उन्हें भी राशि मिलेगी जिसमें खिलाडि़यों की मैच फीस का हिस्सा शामिल है। दक्षिण अफ्रीका क्रिस मौरिस की नीलामी से खुश होगा जबकि वेस्टइंडीज बोर्ड सोच रहा होगा कि उसके 18 में से सिर्फ एक खिलाड़ी को ही क्यों चुना गया।

मैच विजेता और प्रभाव छोड़ने वाले खिलाड़ी जैसे क्रिस गेल, कीरोन पोलार्ड, ड्वेन ब्रावो, आंद्रे रसेल, सुनील नरेन और निकोलस पूरन को भी याद रखना चाहिए जो विभिन्न फ्रेंचाइजियों के पास हैं। कोई भी तुलना शायद ही कभी निष्पक्ष होती है लेकिन उनके प्रदर्शन को देखें और तब अन्य देशों के बड़ी राशि में बिकने वाले खिलाड़ियों को देखें और आप सहमत होंगे कि अधिक राशि खर्च करने वाले खिलाड़ियों की तुलना में वे अधिक अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

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