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’माजिद’ की घर वापसी : आतंकी संगठनों के मुॅंह पर करारा तमाचा

 
आनन्द उपाध्याय ‘सरस‘
 ’’माजिद बहुत बहादुर है। उसे कुछ ही दिनों में जिहाद और बन्दूक की असलियत समझ में आ गई। उसने आतंकवाद का रास्ता छोड़ घर आने का फैसला किया।’’ यह जानकारी विगत दिनों दक्षिण कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों का संचालन कर रही सेना की विक्टर फोर्स के जी0ओ0सी0 मेजर जनरल वी0एस0 राजू ने पुलिस महानिरीक्षक, कश्मीर मुनीर खान की मौजूदगी में माजिद के आत्मसमर्पण की पुष्टि करने के दौरान मीडिया को दी। दक्षिण कश्मीर में वनपोह के पास सेना की वन-राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों के समक्ष माजिद ने औपचारिक आत्मसमर्पण किया। सेना और पुलिस के दोनों अधिकारियों ने एक बार फिर आतंकियों से आत्मसमर्पण करने की पुरजोर अपील दोहराते हुए कहा कि माजिद का फैसला सर्वथा सही है। अधिकारीद्वय का कथन था कि जो भी आत्मसमर्पण करेगा उनके पुर्नवास का पूरा प्रयास कर समाज की मुख्य धारा में शामिल किया जायेगा।
ज्ञातव्य है कि माजिद इरशाद खान वही युवक है जो कुछ दिनों पूर्व घर से बिना बताये दिग्भ्रमित होकर आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी बन गया था। इस होनहार छात्र और दक्षिण कश्मीर के फुटबाल के स्टार खिलाड़ी की पुनः घर वापसी के लिए उनके परिजन ही नहीं अपितु उसके दोस्त लगातार सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों पर सम्पर्क साधने का प्रयास करते हुए माजिद से आतंकवाद की राह छोड़ मुख्य धारा में लौटने की अनवरत अपील कर रहे थे। युवा बेटे के आतंकवादी संगठन में शामिल होने की खबर से माजिद के पिता पर गहरा वज्रपात हआ जिसके चलते उन्हें हार्टअटैक का सामना करना पड़ा। माजिद की मां आयशा बेगम की करूण पुकार और उनके परिजनों के विलाप तथा बेटे के घर लौट आने की गुजारिश और शिद्दत से की गई मान-मनौवल आखिर असरदार साबित हुई।
मीडिया में पुलिस अधिकारियों के हवाले से आई खबर में बताया गया है कि माजिद ने आत्मसमर्पण के बाद फिर से अच्छा नागरिक बन अपने दायित्वों को बखूबी निभाने की स्वीकारोक्ति कर सबको भरोसा दिलाया है। माजिद ने आत्मसमर्पण के द्वारा भारत के लोकतंत्र और देश के संविधान में अपनी आस्था दिखाकर आतंकवादी से मुक्त नूतन जिन्दगी जीने का जो संकल्प लिया है पूरा राष्ट्र इसका स्वागत कर रहा है। माजिद की मां ने अपने राह भटके बेटे की ससमय घर वापसी का पुरजोर खैरमकदम करते हुए अपनी दिली भावना उजागर करते हुए कहा कि, ’’खुदा ने मुझे मेरा जिगर लौटा दिया है। खुदा ने बड़ी रहमत की है। मैं दुआ करती हूॅ कि किसी का बेटा गलत रास्ते पर न जाये, जिसके भी बेटे ने बन्दूक उठाई है वह उसे छोड़ माॅं-बाप के साथ आ जाय।’’
जम्मू-कश्मीर में सीमा पार पड़ोसी देश की आतंकी घुसपैठ और प्रत्यक्ष संरक्षण के चलते पूरी घाटी में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए युवाओं का इस्लाम और कथित जिहाद के नाम पर किये जा रहे ’बे्रनवाॅश’ का बलात् शिकार होकर इससे पहले भी सैकड़ों युवा आतंकवादी विविध संगठनों की गिरफ्त में आ चुके हैं, जिनमें से अनेक सेना और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारे भी गये हैं। जम्मू-कश्मीर ही नहीं अपितु बीते वर्षों में पृथक खालिस्तान की कथित मांग के चलते भी पंजाब, हरियाणा और हिमाचल आदि राज्यों के कतिपय सिक्ख युवकों ने भी धार्मिक उन्माद और भड़काऊ  प्रोपेगंडा के दबाव में पृथकतावादी हिंसक संगठनों के आकाओं की शागिर्दी स्वीकार कर अपनी विघटनकारी मनोवृत्ति दर्शायी थी। खालिस्तान समर्थक अलगाववादियों को सीमापार की भारत विरोधी शक्तियों से मिलने वाले समर्थन, उकसावे और आर्थिक मदद का भांडा फूटने पर समय रहते सच्चाई का भान हो जाने के कारण इन भटके युवाओं ने फिर से देश की मुख्य धारा में समाहित होकर राहत और चैन की सांस ली।
देश के विभिन्न राज्यों विशेषकर केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बीते दिनों राज्यों की खुफिया इकाईयों ही नहीं अपितु केन्द्र सरकार के नियंत्रण में संचालित विविध जांच एजेन्सियों के रडार पर भी कथित जिहाद, इस्लाम और आई0एस0आई0एस0 के विचारधारा से प्रभावित हुए अनेक युवक-युवतियों की सरगरमी व सम्पर्कों का पर्दाफाश हुआ है। कई दक्षिण राज्यों से तो सामान्य पढ़े-लिखे ही नहीं वरन् उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के भी रहस्यमयी तरीके से विदेशी आतंकी संगठनों की कथित सदस्यता लेकर देश से पलायन कर जाने के सबूत जांच एजेन्सियों को प्राप्त हुए हैं। अनेक राज्यों विशेषकर केरल में लव जिहाद के नाम पर आर्थिक प्रलोभन व बलात् दबाव बनाकर हिन्दू व ईसाई युवतियों का कथित धर्मानान्तरण कराये जाने के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं। स्वयं केरल सरकार ने केन्द्रीय जांच एजेन्सी के समक्ष ऐसे मामले जांच के लिए संदर्भित भी किए हैं। धर्मानान्तरण का यह मुद्दा केरल उच्च न्यायालय से निकलकर सम्प्रति सर्वोच्च न्यायालय की चैखट तक आ पहुॅंचा है।
धर्म के नाम पर झूठी और मनगढ़न्त कहानियाॅ गढ़कर अथवा फेक व फाल्स वीडियो क्लिप्स दिखलाकर किशोर व युवा अन्र्तमन पर आक्रोश व घृणा पैदा करने का कुत्सित अभियान पृथकतावादी ताकतों के जरिए बखूबी किया जा रहा है। इस्लामी स्काॅलर के नाम पर अपने विदेश से संचालित चैनल के जरिए अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के विशेषकर किशोरों और युवाओं को जहरीले व राष्ट्रविरोधी कुतर्कों के चलते दी गयी सीख ने ही पड़ोसी देश बांग्लादेश की सरकार की शिकायत के चलते इस कथित स्काॅलर को अपराध दर्ज किए जाने के फलस्वरूप चुपके से भारत से फरार होने पर मजबूर किया है। खेद का विषय है कि इस सम्प्रभु धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार की आढ़ लेकर किये जा रहे इस दुष्कृत्य की भत्र्सना करने के वजाय देश के कथित छद्म प्रगतिशील बुद्धिजीवियों, वामपंथी नेताओं, विदेशी चंदे से फल-फूल रहे एन0जी0ओ0 तथा अनेक प्रिन्ट व इलेक्ट्रानिक मीडिया समूहों के तथाकथित वरिष्ठ पत्रकारों ने भी जाकिर नाईक के पक्ष में सहानुभूति दर्ज कर सहिष्णुता की नई इबारत लिखने का निन्दनीय जतन किया है।
निश्चय ही माजिद के दोटूक साहसिक फैसले ने जम्मू-कश्मीर के पाक परस्त सियासतदानों, अलगाववादी हुर्रियत के आकाओं और विदेश के पैसों से पोषित आतंकी संगठनों के मुॅंह पर करारा तमाचा ही नहीं मारा है अपितु इन देश विरोधी संगठनों की काली करतूतों पर भी कालिख का पलीता लगाकर पूरे विश्व के सामने इस्लामीकरण और जिहाद की इस छद्म कहानी का बखूबी पर्दाफाश भी कर दिया है। वास्तव में माजिद का अपने घर लौटना एक सामान्य घटना न होकर कश्मीर घाटी के दिग्भ्रमित युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा और उद्घोष बनकर राष्ट्र के समक्ष सामने आया है, जो कि सर्वथा स्वागत योग्य ही नहीं अपितु अभिनन्दन योग्य भी है।
देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विगत दिनों वाराणसी में अपनी प्रेस कान्फ्रेंस में यह बयान देकर कि, ’हिन्दुस्तानी मुसलमान किसी भी सूरत में आईएस को जड़े जमाने का मौका नहीं देंगे। देश में इस्लाम को मानने वाले किसी भी सूरत में इस संगठन को अपना समर्थन नहीं दे सकते। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी कश्मीर के युवाओं को पत्थरबाजी और गोलीबारी के चक्रव्यूह से निकलकर मुख्य धारा में आने का आवाह्न किया है।
आज समय की मांग है कि केन्द्र सरकार पूरी शिद्दत और गंभीरता के साथ जम्मू, लद्दाख और कश्मीर घाटी के सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले विशेषकर युवाओं के साथ संवेदनशील तरीके से सीधा संवाद स्थापित करे। विशेषकर घाटी के युवाओं को पूर्णकालिक रोजगार में लगाये जाने का प्रभावी प्रयास किया जाना चाहिए। राज्य की खुफिया इकाईयों को और पुख्ता कर अलगाववादी ताकतों की संदिग्ध गतिविधियों के चलते किये जा रहे युवाओं के ब्रेनवाॅश के घृणित अभियान को पर्दाफाश करने का अभियान चलाना चाहिए। कश्मीर के पर्यटन उद्योग, पारंपरिक हस्तकलाओं, कलात्मक ऊनी उत्पादों के विपणन, फूड प्रोसेसिंग के संयंत्रों की स्थापना आदि की तात्कालिक योजनाएॅं फौरी तौर पर शुरू किया जाना सर्वथा अपरिहार्य है। राज्य और केन्द्र की विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं, पुलिस, पैरामिलिट्री और सेना के विभिन्न घटकों में इस राज्य के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर विशेष कोचिंग का प्रावधान कर भर्ती किया जाना एक व्यवहारिक उपाय सिद्ध होगा।
निश्चय ही माजिद की घर वापसी ने घाटी के युवाओं को जो पैगाम दिया है उसने बीते वर्षों भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई0ए0एस0) में द्वितीय स्थान हासिल करने वाले 23 वर्षीय अतहर आमिर उल सफी खान की स्मृति को ताजा कर दिया है। अतहर ही नहीं अपितु कश्मीर के 7 और युवाओं यथा शीमा क्वासबा वानी, बशीरउल हक, रूवेदा सलाम, आफाक गिरि, दीबा फरहत चैधरी, यासीन और अंकित कौल ने भी इसी बैच के आई0ए0एस0 परीक्षा में सफलता का परचम फहराकर कश्मीर का माथा ऊॅंचा किया था। दंगल फिल्म में पहली बार सजीव अभिनय के जरिए कश्मीर की ही किशोरी जायरा वसीम ने अपनी सख्सियत का झंडा गाड़ दिया था। इसी फिल्म में अन्य महिला कलाकार फातिमा शेख ने भी कश्मीर का नाम बुलन्द किया था। पुरातन समय से जम्मू-कश्मीर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से एक सुसम्पन्न राज्य रहा है। समय आ गया है कि उसी संस्कृति और सांझी विरासत को फिर से पुर्नजीवित करने का सार्थक प्रयास प्रारंभ हो। निश्चय ही घाटी के जागृत युवा मौलिक पहल के द्वारा इस दिशा में उत्प्रेरक ही नहीं बनेंगे अपितु वास्तविक संवाहक भी सिद्ध हो सकेंगे। समूचे राष्ट्र की यही आशावादी संकल्पना है।
 सम्पर्क: 9839611982 लखनऊ।
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