आठ साल पहले घर छोड़ गया था आतंकी सलीम

फतेहपुर। मुम्बई एयरपोर्ट पर एटीएस द्वारा पकड़ा गया कथित आतंकी लगभग 42 वर्षीय सलीम उर्फ दानिश पुत्र मुकीमउद्दीन खान इस जनपद के हथगाम थाना क्षेत्र के बंदीपुर गांव का मूल निवासी है। सलीम समेत चार भाई व दो बहने हैं। इनमें दूसरे नम्बर का कलीम विकलांग है। तीसरे नम्बर का मुस्तकीम व चौथे नम्बर का नसीम है। दो बहनों में नसीबा बेगम व नसरीन बेगम की निकाह हो चुका है। पिता मुकीम उद्दीन का 03 माह पहले इंतकाल हो चुका है। घर पर उसकी लगभग 75 वर्षीय मां एहसान फातिमा अपने 03 बेटों के साथ रहती हैं।

पकड़े गये कथित आतंकी की ससुराल इलाहाबाद में है। उसकी पत्नी अपने बच्चों सहित पति के भाग जाने के बाद मायके में रहती हैं। सलीम का अपने घर से लगभग आठ वर्ष पूर्व से कोई वास्ता नहीं था ऐसा परिजनों का कहना है। वैसे उसकी हरकतों से परिजन हमेशा परेशान रहते थे। बावजूद इसके संशयपूर्ण स्थिति बरकरार है।

ज्ञातव्य रहे कि पूर्व में कथित आतंकी सलीम का लुक आउट नोटिस जारी किया गया था जिसके आधार पर सऊदी से लौटते समय एटीएस ने उसे मुम्बई एयरपोर्ट पर रोक कर पूछताछ की और फिर हिरासत में ले लिया। उक्त कथित आतंकी के पिता के पास 05 बीघा कृषि योग्य जमीन थी जिसमें दो बीघा नसीमा व नसरीन की शादी के समय बेंच दी गयी थी। अब 04 भाईयों के बीच 03 बीघा खेती बची है। गांव के लोगों का कहना है कि यह परिवार बेहद गरीब है।

पकड़े गये कथित आतंकी के भाई विकलांग कलीम का कहना है कि पिता के निधन की सूचना के बावजूद सलीम गांव नहीं आया था। इसके बाद दो बहनों के निकाह में भी वह सरीक नहीं हुआ था। कथित आतंकी के पकड़े जाने की खबर पर गांव में लोगों का जहां जमावड़ा लग गया। वहीं हथगाम पुलिस भी उसके घर के बाहर मौजूद रहकर हकीकत से रूबरू होने का प्रयास कर रही है। कथित आतंकी सलीम के पकड़े जाने की खबर से गांव ही नहीं रिश्तेदारों व आस-पास के गांव के लोग भी इसे आश्चर्य मान रहे हैं।
सलीम की शिक्षा-दीक्षा के साथ-साथ उसके क्रिया-कलापों का स्पष्ट हवाला नहीं मिलता।

इस जनपद में उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं है। यही नहीं सलीम का आतंकियों से जुड़ाव लोगों की समझ से फिलहाल परे है, किन्तु जहाॅ तक देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता का सवाल है। हर सुनने वाले शख्स ने इस मामले को न सिर्फ गंभीरता से लिया, बल्कि कई गड़े मुर्दे भी उखाड़े। सवाल यह उठता है कि सलीम के तार वहाॅ से कैसे जुड़े।

क्या इस जिले में भी स्लीपर सेल की संभावित कड़ी मौजूद है। या फिर लगभग डेढ दशक पूर्व सिमी के तथाकथित दशहतगर्दो के खिलाफ तत्कालीन राजनाथ सरकार द्वारा उठाये गये कदम के बाद वह सीधेतौर पर आतंकवादियों के ताल्लुक में आ गया। फिलहाल इस मामले में प्रशासन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुॅच सका है। जिम्मेदारों का कहना है कि जब तक कोई ऊपर से आदेश नहीं आता अग्रिम कार्यवाही नहीं की जाएगी। इधर जनपद में अघोषित अलर्ट जारी कर दिया गया है। सार्वजनिक स्थानों खासकर भीड़-भाड़ वाले इलाकों में खासतौर पर चौकसी बरती जा रही है।

=>