उत्तर प्रदेश

’शुल्क विनियमन विधेयक’ से खत्म होगी स्कूलों की मनमानी : उप मुख्यमंत्री


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने शुक्रवार को प्रस्तावित वित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का विनियमन) विधेयक 2017 विधेयक प्रस्तुत किया। इस मसौदे पर अभी 22 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं। अगले शैक्षिक सत्र से इसे लागू किया जाएगा। मंडलायुक्त को अध्यक्षता में एक कमेटी शुल्क के विवादों की सुनवाई करेगी।
डॉ शर्मा ने आज मीडिया सेन्टर में आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव, मनमानी फीस वसूली पर रोक और अभिवावकों को राहत देने की बात करते हुये प्रस्तावित ’उप्र वित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का विनियमन) विधेयक, 2017 को मुख्य प्राविधान, आपत्तियों एवं सुझावों के लिए जारी कर दिए। अब इस पर रायशुमारी के बाद इसे कानूनी स्वरुप देकर अभिवावकों को बड़ी राहत देने के लिए इसी लागू किया जा सकेगा।
उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बताया कि इस विधेयक का प्रस्तावित स्वरुप तैयार है, अब इसपर आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किये जा रहे हैं। इसके बाद इस विधेयक को कानूनी जामा पहनाने की अग्रेतर कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। डॉ शर्मा ने कहा कि गुणवत्ता परक शिक्षा के साथ अभिवावकों का संरक्षण हो सके, तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुल्क के मामले पर दिए गए निर्देशों का अनुपालन भी सुनिश्चित रह सके, इन सभी बातों को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रस्तावित विधेयक तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को तैयार करने से पूर्व देश के विभिन्न राज्यों में लागू शुल्क विनियमन विधेयकों का अध्ययन किया गया, अनेकों शिक्षाविदों की राय ली गयी। उन्होंने बताया कि विधानपरिषद में शिक्षक दल के सदस्यों की भी राय को शामिल किया गया, अभिवावकों एवं विद्यालय संचालकों की भी राय ली गयी, तब यह प्रस्तावित विधेयक तैयार कर सामने लाया गया है। अभी यह विधेयक का प्रस्तावित स्वरुप मात्र है। इसे लागू होने से पहले आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया से गुजरना होगा। आज से यह बेबसाइट  पर उपलब्ध होगा। सम्बन्धित कोई भी व्यक्ति या संस्था अपना लिखित सुझाव या आपत्तियां 22 दिसम्बर तक निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश को ईमेल आईडी कमेमबमकन/हउंपसण्बवउ पर अथवा पत्र के माध्यम से भेज सकता है।
एक सवाल के जबवा में डॉ शर्मा ने कहा कि यदि यह प्रस्तावित विधेयक क़ानून बना तो इसके लागू होने के बाद जूता, मोजा, टूर और विकास के नाम पर अनावश्यक फीस वसूली बिलकुल भी नहीं हो पाएगी। माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 6 से कक्षा 12 तक) के ऊपर प्रभाव डालने वाले इस प्रस्तावित ’शुल्क विनियमन विधेयक’ के लागू हो जाने के बाद हर प्रकार की फीस के सम्बन्ध में नियम लागू हो जाएंगे। प्रदेश में चल रहे सभी माध्यमिक विद्यालयो पर चाहे वे यूपी बोर्ड से सम्बद्ध हों अथवा किसी अन्य शैक्षिक बोर्ड से संचालित हों यदि वे 20 हजार से ऊपर सालाना शुल्क लेते हैं उन सभी विद्यालयों पर यह ’शुल्क विनियमन नियम’ बाध्यकारी होंगे।
डा. शर्मा ने कहा कि जो स्कूल इसका उल्लंघन करेंगे उन पर 1 लाख का जुर्माना पहली शिकायत पर होगा। दूसरी शिकायत साबित होने पर 5 लाख का जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि स्कूल एडमिशन फीस बार बार नहीं ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल पहले पांचवीं तक, फिर क्लास 6 में एडमिशन फीस ले सकते हैं और फिर क्लास 9 में एडमिशन फीस ले सकते हैं। फीस सालाना लेना अनिवार्यता नही होगी। स्कूलों में व्यावसायिक एक्टिविटी से आय को स्कूल के आय में जोड़ा जाएगा और फिर बच्चों की फीस तय होगी।
डा. शर्मा ने कहा कि डेवलपमेन्ट का फंड सिर्फ विद्यालय की पूरी आय की 15 प्रतिशत ही हो सकती है।

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