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जब 25 साल की बेटी ने अपने लिए पिता, और मां के लिए पति खोज कर, मां की कराई शादी

जयपुर। राजस्थान की राजधानी में 25 साल की एक बेटी ने अपनी विधवा मां की दूसरी शादी करवाकर समाज में एक नई मिसाल पेश की है। सोशल मीडिया पर समाज सुधार के इस प्रयास को काफी सराहा जा रहा है। सवाल-जवाब से जुड़ी एक ब्लॉगिंग वेबसाइट पर साहसी बेटी के पोस्ट को 2 लाख से ज्यादा लोग पढ़ चुके हैं।

दरअसल, गुलाबी नगरी जयपुर में रहने वाली संहिता अग्रवाल के 52 साल के पिता मुकेश गुप्ता की 13 मई 2016 को अचानक साइलेंट अटैक से मौत हो गई थी। यह उनके लिए एक सदमे के रूप में आया था, क्योंकि मेरे पिताजी बिल्कुल भी बीमार नहीं थे और हमने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि यह इतनी जल्दी हो सकता है। उस घटना के बाद संहिता की मां गीता अग्रवाल डिप्रेशन में चली गईं। उधर, बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी इसलिए घर में मां और छोटी बेटी संहिता ही बचे थे।

रात में टीवी चलाकर सोने की नौबत

संहिता ने बताया, ”पिता के निधन के 6 महीने बाद भी कोई राहत नहीं मिली थी। मुझे वह दिन याद है जब मैं ऑफिस से आती थी तो दुख में डूबी हुई मां मुझे घर के बाहर सीढ़ियों बैठी मिलती थीं। मुझे याद है कि गमगीन मां नींद में चिल्लाकर और अचानक मुझे जगाते हुए पूछती थीं कि पापा कहां हैं? और मैं उन्हें वापस सोने के लिए कर देती थी। संहिता अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बताया कि जयपुर के बाद उनकी गुड़गांव में जॉब लग गई तो घर में मां अकेली रह गई थीं। उन्हें अकेलापन इतना खलने लगा कि वो रात के वक्त टीवी चलाकर सोने लगीं ताकि घर में किसी के होने का अहसास हो।

मैट्रिमोनियल साइट पर रिश्ता
मां के अकेलापन बेटी से देखा नहीं जा रहा था, इसलिए उसने 2016 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर जाकर मां को बिना बताए उनकी प्रोफाइल बना दी। इसके बाद रिश्ते आना शुरू हो गए।

इन्हीं में एक 55 साल के गोपाल गुप्ता शादी के लिए तैयार हुए। हालांकि, जब यह बात बेटी ने अपनी मां को बताई तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। दरअसल, बांसवाड़ा में रेवेन्यू अधिकारी के पद पर पदस्थ गोपाल गुप्ता की पत्नी सात साल पहले कैंसर से मर चुकी थीं। उसके बाद से वे भी अकेले रह गए थे।

फिर ऐसे आगे बढ़ी रिश्ते की बात
इसी बीच संहिता की मां गीता का यूट्रस का मेजर ऑपरेशन हुआ, तो गोपाल को इसकी खबर लगी। रिश्ता तय न होने पर भी गोपाल गुप्ता हॉस्पिटल में गीता की तीमारदारी करने पहुंच गए।
इसके बाद उस शख्स के निस्वार्थ सेवाभाव से गीता भी प्रभावित हो गईं और दोनों ने विवाह बंधन बंधने का फैसला ले लिया।

रिश्तेदारों का विरोध
इस संबंध में गीता के परिजन और रिश्तेदारों ने फैसले का विरोध भी किया। हालांकि, दोनों ने अपने चुनिंदा रिश्ते-नातेदारों की मौजूदगी में आर्य समाज मंदिर में शादी कर एक दूसरी वैवाहिक जिंदगी की शुरुआत कर दी।

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