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मंत्री के कृपापात्र आशिक मिजाज गुरूजी के आगे मथुरा प्रशासन बेबस

-मंत्री के कृपापात्र जूनियर के प्रधानाध्यापक ने प्राइमारी की प्रधानाध्यापिका का जीना किया मुहाल
-सस्पेंड होने के बाद भी नहीं छोड़ रहा प्रधानाध्यापिका का पीछा
-डीएम से मिल प्रधानाध्यापिका ने फिर लगाई इज्जत बचाने की दुहाई
मथुरा। एक मंत्री के कृपापत्र आशिक मिजाज गुरूजी के आगे प्रशासन भी बेबस है। चौमुहां ब्लाक के नहर गांव के जूनियर और प्राइमरी स्कूल एक ही कैंपस में स्थित हैं। प्राइमरी के प्रधानाध्यापिका आशा कुमारी हैं जूनियर के प्रधानाध्यापक निरंजन सिंह हैं। निरंजन सिंह फिलहाल आशा कुमारी की शिकायत पर ही स्पसेंड चल रहे हैं। इसके बाद भी निरंजन सिंह आशा कुमारी का पीछा छोड़ नहीं रहे। मामला डीएम से लेकर बेसिक शिक्षा सचिव तक पहुंच चुका है। आशा कुमारी अब किसी दूसरे विद्यालय में स्थानांतरण या संबद्धिकरण चाह रही हैं लेकिन उन्हें यह भी नसीब नहीं हो रहा है। इसके लिए वह एक सप्ताह के अंदर ही दो बार डीएम से गुहार लगा चुकी हैं।
जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक की छेड़छाड़ और गलत हरकतों से आजिज प्राइमरी विद्यालय की प्रधानाध्यापक लगातार आलाअधिकारियों से खुद की जानमाल और इज्जत की सुरक्षा की गुहार लगा रही हैं, लेकिन एक मंत्री के कृपापात्र सस्पेंड चल रहे प्रधानाध्यापक के खिलाफ कोई कार्यवाही करने के अधिकारी हिचक रहे हैं। यह आलम तब है जब प्राइमरी विद्यालय की पीड़ित प्रधानाध्यापिका आशा देवी पिछले तीन महीने से अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रही हैं। बीएसए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी, जिलाधिकारी, सचिव बेसिक शिक्षा को लगातार शिकायत कर चुकी हैं। विगत एक सप्ताह में ही वह दो बार जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगा चुकी हैं।
पीड़ित किसी अन्य विद्यालया में संबद्धिकरण, स्थानांतरण का प्रयास भी कर रही हैं लेकिन यह भी नहीं हो पा रहा है। इस समय बीएसए करीब सौ प्राधानाध्यापकों के स्थानातरण और संबद्धीकरण की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं लेकिन इस में भी आशा कुमारी को सामिल नहीं किया गया है। पीड़िता आशा कुमारी डीएम को बताया कि जैसे ही वह विद्यालय पहुंती है, सस्पेंड चल रहे जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक निरंजन सिंह भी विद्यालय जा धमकते हैं। करीब एक सप्ताह पहले जैसे ही वह विद्यालय पहुंची निरंजन सिंह भी विद्यालय पहुंच गये। उन्होंने दुपट्टा पकड़क कर उन्हें खींचा, इस पर सहायक अध्यापिका सरोज देवी ने विरोध किया दोनों को निरंजन सिंह ने धक्का दे दिया। सरोज देवी ने इसी बीच 100 नम्बर पर पुलिस को सूचना दे दी, पुलिस भी विद्यालय पहुंच गई। प्राइमरी और जूनियर दोनो विद्यालयों की बिल्डिंग एक ही कैंपस में हैं। पुलिस के पहुंचते ही निरंजन सिंह और उसके साथी प्रधानाध्यापिका को धमकाते हुए चले गये। डर की वहज से वह नियमित विद्यालय नहीं जा रही हैं, ऐसे में बीएसए आॅफि से उनका वेतन भी रोक दिया गया है। वेतन रुकने के बाद उन्होंने बीएसए आॅफिस में उपस्थिति लगाना शुरू कर दिया है। इस विद्यालय में वह पिछले पांच साल से कार्यरत हैं। उन्हीं की शिकायत पर कुछ समय पहले जूनियर के प्रधानाध्यापक निरंजन सिंह को निलंबित भी कर दिया गया है, उनका कहना है कि इसके बाद भी वह बाज नहीं आ रहे हैं, एक सप्ताह के अंदर दो बार डीएम सर्वज्ञराम मिश्र से मिल कर गुहार लगा चुकी हैं। उन्होंने भी मामला बीएसए पर ही डाल दिया है।

— उनकी जान को खतरा है, उनके साथ किसी भी समय कोई हादसा हो सकता है, डीएम से लेकर बेशिक शिक्षा सचिव तक के दफ्तरों के चक्कर काट रही हूं, एक मंत्री का कृपापत्र प्रधानाध्यापक उसके साथ कोई भी घटना कर सकता है, डीएम से दो बार गुहार लाग चुकी हैं, कोई सुनने को तैयार नहीं है
-आशा कुमारी, पीड़ित प्रधानाध्यापक

— प्रधानाध्यापिका आशा कुमारी के पहुंचते ही सस्पेंड चल रहे जूनियर के प्रधानाध्यापक निरंजन सिंह विद्यालय आ जाते हैं, वह गलत हरकत करते हैं, विरोध करने पर हमारे साथ भी हाथपाई कर देते हैं, डीएम साहब से मिले हैं, उन्होंने भी बीएसए को ही मामला देखने के लिए कह दिया है।
-सरोज देवी, सहायक अध्यापिका

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