कारोबार

भूले बिसरे खातों से बैंक हुए मालामाल, 8865 करोड़ का कोई दावेदार नहीं

नयी दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की जन धन योजना और नोटबंदी के कारण गरीब भले ही कम लाभान्वित हुए हों, लेकिन बैंकों को इससे भरपूर लाभ हुआ है। वर्ष 2016 तक देश के अलग-अलग बैंकों के 2.63 करोड़ खातों में 8864.6 करोड़ रुपये का कोई मालिक नहीं हैं। इसमें दो वर्षों में और वृद्धि हुई है, जिसका आंकड़ा आना बाकी है।

भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 से 2016 तक पिछले चार सालों में बैंकों में रखा अनक्लेम्ड पैसा दोगुना से भी अधिक हो गया है। ऐसे खातों की संख्या 2012 में 1.32 करोड़ थी जो 2016 में बढ़कर 2.63 करोड़ हो गयी। वहीं 2012 में बैंकों में जमा पैसा 3,598 करोड़ रुपये था जो कि 2016 में बढ़कर 8,864.6 करोड़ रुपये हो गया था। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को निर्देश दिया है कि जिन खातों का कोई खाताधारक या रिश्तेदार सामने नहीं आया है, उनकी लिस्ट बैंक के वेबसाइट पर डाल दें, जिससे इन खातों को क्लेम करनेवाला कोई है तो आगे आये।

केवाईसी के कारण खाते हुए बंद
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार देश के अलग-अलग बैंकों के 2.63 करोड़ खातों में लेनदेन बंद हो गया है। इस खातों में जमा 8,864.6 करोड़ रुपए यूं ही बेकार पड़े हैं। इनका कोई दावेदार नहीं है। बैंक सूत्रों के अनुसार सरकार ने जब खाताधारकों से केवाईसी जमा करवाना शुरू किया और इसमें कड़ाई की गयी तो कई लोगों ने खातों में लेनदेन बंद कर दिया। कई खातों के मालिक का निधन भी हो गया है। उनके खातों में जमा धन पर क्लेम करने कोई नहीं आता। नियमानुसार बैंक ऐसे लोगों को ही मृतक के खाते से पैसे निकालने देता है जो खाताधारी से अपना करीबी संबंध का प्रमाण दे पाते हैं। कई लोग कानूनी दाव-पेंच से बचने के लिए पैसे निकालते ही नहीं।

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