Thursday, October 1, 2020 at 8:09 AM

‘आप’ को हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार


नई दिल्ली। लाभ का पद मामले में चुनाव आयोग द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश के बाद पार्टी ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने इस दौरान पार्टी को फटकार लगाते हुए करारा झटका दिया।

कोर्ट ने कहा कि पार्टी को फौरी तौर पर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इससे पहले कहा कि आप ने खुद से ही तय कर लिया कि चुनाव आयोग के पास जाना है कि नहीं। कोर्ट के मुताबिक, जब पार्टी चुनाव आयोग के पास गई ही नहीं तो वह कैसे कह सकती है कि उसकी इस मामले में सुनवाई नहीं हुई। आम आदमी पार्टी का तर्क है कि इस मामले में चुनाव आयोग को फैसला लेने का अधिकार ही नहीं था। हाईकोर्ट ने इस दौरान चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा।

साथ ही यह पूछा कि क्या कोई सलाह दी गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद कहा कि अभी तक के तथ्यों पर राहत दिया जाना मुश्किल है। बीच में 10 मिनट का ब्रेक भी हुआ, जिसके बाद सुनवाई फिर से शुरू हुई। कोर्ट में सोमवार को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी। बता दें कि आप के वकीलों ने यह भी कहा कि उनका पक्ष सुने बिना ही आयोग ने इस मामले में फैसला ले लिया। सुनवाई के वक्त अदालत में पार्टी के छह विधायक मौजूद थे। पार्टी का यह भी कहना है कि जब हाईकोर्ट ने काफी पहले यह मान लिया कि उनके विधायक संसदीय सचिव नहीं हैं, ऐसे में इस मामले पर उनपर कैसे कार्रवाई हो सकती है।

उधर, 20 विधायकों की सदस्यता जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस ने भी कमर कसनी शुरू की। पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पार्टी का एक भी विधायक जीतने में असफल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार शाम कांग्रेस ने बैठक कर पूरे मामले पर राय-मशविरा किया। पार्टी नेताओं का दावा है कि अगर तुरंत चुनाव हुए तो पार्टी 20 में से 13 सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, भाजपा के कई नेताओं ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल को इस्तीफा दे देना चाहिए।

loading...
Loading...